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बुधवार, 7 जनवरी 2026

मलयपुर में बांस शिल्प को नई उड़ान, 25 दिवसीय रूपांकन तकनीक कार्यशाला का शुभारंभ

बरहट/जमुई। हस्तशिल्प विभाग एवं वस्त्र मंत्रालय के सौजन्य से सहभागी महावीर हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा मंगलवार को मलयपुर में बांस शिल्प अंतर्गत रूपांकन तकनीक पर आधारित 25 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य परंपरागत बांस शिल्पकारों के कौशल को आधुनिक तकनीक, डिजाइन नवाचार और बाजार की मांग के अनुरूप सशक्त बनाना है, ताकि उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।

कार्यशाला का उद्घाटन उद्योग महाप्रबंधक नितेश शांडिल्य, प्रमुख रूबेन कुमार सिंह उर्फ बुल्ली सिंह, पंचायत की मुखिया अनिता देवी तथा पूर्व मुखिया अशोक कुमार राव ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन अवसर पर वक्ताओं ने बांस शिल्प के महत्व, इसके बाजार संभावनाओं और रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में बांस शिल्पकारों को कौशल उन्नयन के साथ-साथ डिजाइन में नवाचार और आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान बांस से डस्टबिन, मिठाई बॉक्स, पेपर बॉक्स, साजिया सहित अन्य उपयोगी घरेलू सामग्री बनाने की विधियां सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण को व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए सभी प्रशिक्षुओं को आवश्यक औजार और मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

महावीर हैंडीक्राफ्ट्स प्रोड्यूसर कंपनी के निदेशक राहुल रंजन ने बताया कि इस प्रशिक्षण में कुल 30 प्रशिक्षु भाग ले रहे हैं, जिन्हें प्रतिदिन 6 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उपस्थिति की निगरानी के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम की व्यवस्था की गई है, जिसमें कम से कम 80 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को प्रतिदिन 300 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

प्रशिक्षण का संचालन बंगाल से आए मास्टर ट्रेनर श्रीनाथ टुडू एवं गया के अनुभवी डिजाइनर पप्पू कुमार द्वारा किया जाएगा, जो बांस शिल्प के क्षेत्र में अपने अनुभव से प्रशिक्षुओं को व्यावसायिक रूप से दक्ष बनाएंगे।
उद्योग महाप्रबंधक नितेश शांडिल्य ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लोग बांस से नए-नए उत्पाद तैयार कर राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे। इससे उनकी आय के स्रोत बढ़ेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कई जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर लोग अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं। चकाई में 210 एकड़ भूमि उपलब्ध कराकर बिपार्ट को भेजी गई है, जहां नए उद्योग स्थापित होने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

प्रमुख रूबेन कुमार सिंह ने कहा कि प्रशिक्षण में भाग लेने वाले शिल्पकार सकारात्मक सोच के साथ इस कला को सीखें और इसे अपनी आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाएं, ताकि भविष्य में स्वरोजगार को बढ़ावा मिले। वहीं मुखिया अनिता देवी ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से ग्रामीण लोग आत्मनिर्भर बनेंगे और रोजगार के माध्यम से अपने परिवार का सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकेंगे। कार्यशाला को लेकर स्थानीय शिल्पकारों में उत्साह का माहौल है और इसे क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।

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