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सिमुलतला : जानिए क्या है पौराणिक दुबे मंदिर का इतिहास, जहाँ आते हैं 52 गांव के लोग

सिमुलतला/जमुई (Simultala/Jamui)| प्रीतम कुमार [Edited by: Sushant] : सोमवार को चकाई प्रखंड के सिमुलतला थानाक्षेत्र के कल्याणपुर पंचायत अंतर्गत गदीप्याफेड गांव स्थित पौराणिक दुबे मंदिर में विधि-विधान पूर्वक वार्षिक पूजा सम्पन्न हुआ। महिला पुरुष श्रद्धालु तड़के से पास के नदी, जल सरोवर व जोर से स्नान कर दंडवत देते हुए बाबा के दरबार तक पहुंचे। बाबा दुबे को दस-ग्यारह क्विंटल से भी ज्यादा दूध से बने महाप्रसाद से बाबा का भोग लगाया गया। क्षेत्र के सैकड़ो ब्राह्मणों सहित उपस्थित श्रद्धालुओं को बाबा के चढ़े प्रसाद का वितरण किया गया।

ऐसी मान्यता है कि जहरीला से जहरीला विषधर जंतु किसी को काटने के बाद अगर वह व्यक्ति बाबा के दरवार में पहुंचता है तो बाबा के नीर पीते ही वह व्यक्ति भला चंगा हो जाता है। ऐसे उदहारण एक दो में नही बल्कि सैकड़ो में मिलते है। पूजा के दौरान दर्जनों लोग अपनी आपबीती सुनाई। बाबा के प्रति श्रद्धा-भाव रखने वाले हजारों क्षेत्रवासी वार्षिकोत्सव में शामिल होते है।

मंदिर के वार्षिक पूजा के पुजारी अशोक पांडेय, गोपाल कृष्ण पांडेय एवं नियमित पुजारी कारू राय, रामसूरत राय कहते है बाबा के मंदिर में क्षेत्र के 52 गांव के किसानों का गाय का दूध वार्षिक पूजा में चढ़ावा के लिए स्वेच्छा से लाते है। बाबा के प्रति 52 गांवो के किसान का भक्ति-भाव इस प्रकार का है कि भद्रा नक्षत्र आते ही तला हुआ सामान मसलन पुआ, पकवान और दूध से बने कोई व्यंजन नहीं बनाते।

मंदिर का निर्माण 1346 ई. में तत्कालीन जमींदार साधु सरण राय के पूर्वज के द्वारा बनाया गया था। रिवाज के अनुसार मंटू पंडित के पूर्वज द्वारा भोग के लिए चूल्हे का निर्माण करते है। मंदिर के सेवक शंकर रवानी एवं अशोक रवानी कहते है। बाबा के शरण में 52 गांव के ग्रामीण के अलावा झारखंड के देवघर, गिरिडीह सहित बांका एवं जमुई के अलावा दूर दराज के श्रद्धालु आते है। ग्रामीणों ने दुख प्रकट करते हुए कहते है, बाबा के दरवार तक आज तक पक्की मार्ग का निर्माण नहीं हुआ। दूर-दराज के श्रद्धालु पगडंडी से ही चलकर बाबा के दर्शन को जाते है।

पूजा की निगरानी स्थानीय प्रशासन के साथ युवा जन कल्याण शक्ति के सदस्य युगल किशोर पंडित, कृष्णदेव पंडित उर्फ कारू पंडित, दीपक कुमार, रोहित यादव, गोलू कुमार, विवेक राय, निपुण राय, अंतु कुमार, सुभाष कुमार, गजानंद पंडित, पिंटू कुमार, गुड्डू कुमार के साथ ग्रामीण नुनेश्वर पंडित, सरपंच श्रीधर पंडित, जीतू पंडित, समर पंडित, प्रदीप कुमार, मनोज पंडित आदि के द्वारा किया जा रहा था ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार असुविधा ना हो। स्थानीय प्रशासन पूजा के दौरान मजबूती के साथ गस्ती कार्य को अंजाम देते देखे गए।