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गिद्धौर : केवाल गांव में शुद्ध पेयजल को तरस रहे वार्ड नं. 01 के महादलित ग्रामीण



Gidhaur/ गिद्धौर (धंनजय कुमार 'आमोद') -:


 आजादी के 74 बर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक नक्सल प्रभावित पूर्वीगुगुलडीह पंचायत अंतर्गत केवाल गांव के पड़ने वाले वार्ड नं 01 महादलितवासी के लोग शुद्ध पेयजल हेतु तरस ही रहे है।जबकि सूबे की सरकार सात निश्चय योजना के तहत राज्य भर के गांवों में बसे लोगो को मुख्यमंत्री जल नल योजना के तहत शुद्ध पेयजल पहुचाने का दावा कर रही है।लेकिन गिद्धौर प्रखंड केवाल गांव के महादलितवासी आज भी नल के जल को तरस ही रहे है। जबकि उक्त गांव में नल का जल पहूंचाने की सुध न तो पंचायत के निवर्तमान मुखिया ने ही ली और न ही  प्रखंड कार्यालय में कार्यरत पदाधिकारियों ने ही इसकी सुधि आज तक ली है।तो उक्त गांव में अन्य सरकारी सुविधा गांव वासी को उपलब्ध कराने की बात बेमानी होगी। जबकि ग्रामीण इलाकों में सरकार से लेकर विभागीय पदाधिकारी सात निश्चय योजना के तहत हर घर को शुद्ध जल,बिजली, सड़क एवं स्वास्थ्य सुविधा पहूंचाने का दावा करते नही थक रहे। लेकिन केवाल गांव में उपरोक्त सभी योजनाएं दम तोड़ती ही नजर आ रही है।पूर्वीगुगुलडीह पंचायत के वार्ड नंबर एक में पड़ने वाला महादलित निवासी चंपा देवी,धनिया देवी,कुंती देवी,लछिया देवी,बेबी देवी,जनकबा देवी,सोनिया देवी,सीमा देवी,नारायण मांझी,दरोगी मांझी,मिथुन मांझी,गोवर्धन मांझी,चंदन मांझी,सहित दर्जनों वार्डवासियों ने बताया की  हमारे गांव में मुख्यमंत्री नल जल योजना की बात तो छोड़िए विभाग द्वारा गड़वाया गया इक्का दुक्का चापानल भी मृत प्राय पड़ा हुआ है।जिसकी वजह से गांव वासी सालों से कुंए का दूषित जल ही पीने को विवश है। उन्होंने कहा कि प्रखंड के अंतिम छोर में बसा गांव है।वही पंचायत चुनाव की तिथि घोषित होने के साथ इस टोले में जनप्रतिनिधियों द्वारा वोट मांगने आते है, और विकास की लंबी लंबी बाते करते है।लेकिन चुनाव जीत कर जाने के बाद फिर कभी इधर हमलोगों की समस्या हल करने की बात तो दूर हालचाल भी पूछने नही आते है।ऐसे में हम सभी लोग अपने दिनाचार्य में लग जाते है।जबकि हर तरफ विकास की बयार बह रही है लेकिन हम वार्डवासी शुद्ध जल को तरस रहे है। उक्त गांव पर आज तक न तो पंचायत के जनप्रतिनिधियों की नजर पड़ी है और न ही बाबू लोग ही हमारा हाल चाल लेने आते है। उन्होंने कहा कि दस वर्षों से लगातार उपरोक्त सभी लोग से  शुद्ध पेयजल की व्यवस्था को बहाल करने की गुहार लगा थक हार चुके है लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नही दिया।


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