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बुधवार, 26 अगस्त 2020

झारखंड सरकार की नई पहल, अब पोर्टल और मोबाइल एप्प से घर बैठे कर सकेंगे एफआईआर




रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रामगढ़ और खूंटी जिले को छोड़ राज्य के शेष 22 जिलों में ई-एफआईआर थाना सृजन से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद की स्वीकृति ली जाएगी। ई-एफआईआर थानों के सृजन का आधार आम नागरिकों को बिना थाना गए पोर्टल या मोबाइल एप्प के माध्यम से ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराना है। ई- एफआईआर के क्रियान्वित होने से आम नागरिकों को वाहन चोरी, विभिन्न प्रकार की संपत्ति चोरी, सेंधमारी, महिला एवं नाबालिगों से संबंधित अपराध, नाबालिगों की गुमशुदगी से संबंधित कांड जिसमें अभियुक्त अज्ञात हो, ऐसे मामलों में ऑनलाइन प्राथमिकी दर्ज कराने में अनावश्यक परेशानी से निजात मिलेगी। ई-एफआईआर की सुविधा से नागरिकों और पुलिस, दोनों के बहुमूल्य समय और संसाधनों की भी बचत होगी।

*ऐसे दर्ज कराया जा सकेगा ई-एफआईआर*

जिस व्यक्ति को किसी कांड में ई-एफआईआर दर्ज कराना है, उन्हें समाधान पोर्टल पर लॉग इन कर अपना आवेदन ई-साइन या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से समर्पित करना होगा। आम नागरिकों के समाधान पोर्टल या मोबाइल एप के माध्यम से वाहन चोरी, अन्य विविध संपत्ति की चोरी, सेंधमारी और नाबालिगों की गुमशुदगी जिसमें अभियुक्त अज्ञात हो से संबंधित प्राप्त  शिकायतों के आधार पर थाना प्रभारी ई-एफआईआऱ संबंधित धाराओं के तहत कांड दर्ज कर जिस स्थानीय थाना क्षेत्र में घटना हुई है, उसके पुलिस पदाधिकारी को जांच के लिए नामित करेंगे। इसके अलावा पुलिस महानिदेशक अथवा पुलिस महानिरीक्षक स्तर से समीक्षोपरांत ऐसा प्रतीत हो कि इस कांडों के अलावे अन्य विविध कांडों जिनकी प्रकृति ई-एफआईआर मानकों के तहत हो, उन्हें अपने स्तर से ई-एफआईआर के तहत सूचीबद्ध करने हेतु अलग से आदेश जारी किया जा सकेगा।

*प्राथमिकी की प्रति वादी को प्रेषित किया जाएगा*

थाना प्रभारी खुद डिजिटली सिग्नेचर की हुई प्राथमिकी की प्रति वादी के साथ सभी संबंधित अधिष्ठानों जैसे- जिस थाना क्षेत्र में घटना हुई हो उसके थाना प्रभारी, उक्त थाना के पर्यवेक्षण पदाधिकारी, संबंधित कोर्ट, बीमा कंपनी (अप्लीकेबल होने पर), सभी पीसीआर, पुलिस अधीक्षक, एससीआरबी एवं एनसीआरबी को इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिट/ई-मेल के माध्यम से भेजेंगे।

*इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल में होगा अनुसंधान, केस डायरी की प्रविष्टि भी इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट में*

अनुसंधानकर्ता द्वारा कांड का अनुसंधान कार्य पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल में किया जाएगा। अनुसंधान के क्रम में की गई कार्रवाई एवं केस डायरी की प्रविष्टि भी इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट में होगी। साथ ही जिन कांडों में प्राथमिकी दर्ज होने से 30 दिनों के अंदर उद्भेदन नहीं हो पाए तो संबंधित अनुसंधानकर्ता ई-एफआईआर थाना प्रभारी के माध्यम से उक्त अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में समर्पित करेंगे।

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