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प्रशांत भूषण को सजा हुई तो अदालतों में सुधार की गुंजाइशों पर पूर्ण विराम लग जायेगा : अमन समिति

 


पटना (14 अगस्त 2020) : अगर प्रशांत भूषण (Prashant Bhushan) को सजा हुई तो अदालतों में सुधार की गुंजाइशों पर पूर्ण विराम लग जायेगा. उक्त बातें अमन समिति (Aman Samiti) के संयोजक एवं पत्रकार धनंजय कुमार सिन्हा (Dhananjay Kumar Sinha) ने मोबाइल (Mobile) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा.


जस्टिस (Justice) अरूण मिश्रा (Arun Mishra) की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) की तीन जजों की बेंच ने प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना के मामले में दोषी करार दिया है. यह फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनाया गया. कोर्ट आगामी 20 अगस्त को इसी मामले में प्रशांत भूषण पर सजा की सुनवाई करेगा.


अमन समिति के संयोजक धनंजय कुमार सिन्हा ने उक्त मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वकील प्रशांत भूषण ने अपने वकालत के कैरियर में साधारण क्लाइंट के अलावे भी जनहित के अनेक मामलों में खुद से संज्ञान एवं रूचि लेकर मुकदमा लड़ा, जिससे देश के आम लोगों को वृहत स्तर पर न्याय का लाभ मिला. प्रशांत भूषण के कार्य-रिकॉर्ड एवं रवैया से स्पष्ट जान पड़ता है कि वे लोगों को उचित न्याय मिले, इसके लिये हमेशा व्याकुल एवं प्रयत्नशील रहने वाले वकीलों में से एक हैं. देश को आर्थिक नुकसान पहुँचाने वाले राजनीतिक एवं सरकारी निर्णयों के खिलाफ भी उन्होंने कई मुकदमे लड़े हैं.


धनंजय ने कहा कि प्रशांत भूषण जैसे वकील देश एवं दुनिया के समस्त लोकतंत्र के लिये अनुकरणीय हैं. उन्हें दोषी करार दिया जाना बेहद चिंताजनक है. अगर उन्हें जेल की सज़ा सुनाई गई तो भविष्य में न्यायालयों की कमियों पर कोई भी ऊँगली उठाने का साहस नहीं कर सकेगा, और न्यायालयों के निरंकुश होने का खतरा बढ़ जायेगा. न्यायालयों में सुधार के समस्त गुंजाइशों पर पूर्ण विराम लग जायेगा. इससे लोकतंत्र को बड़ा आघात पहुँच सकता है. 


धनंजय ने कहा कि इस सन्दर्भ में अमन समिति 15 अगस्त (15 August) को समन्धित बेंच के सदस्यों, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (Chief Justice), राष्ट्रपति (President), प्रधानमंत्री (Prime Minister) विपक्ष के नेता, लोकसभा एवं राज्यसभा के सभापतियों इत्यादि को पत्र लिखकर सम्बंधित मामले पर उदार नजरिया बनाये रखने का आग्रह करेगी. साथ ही, समिति प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण से भी यह आग्रह करेगी कि कानून के क्षेत्र में उनका अद्वितीय योगदान देशवासियों को प्राप्त होता रहे, इसलिये वे भी ऐसे व्यक्तिगत मामलों में उदारता के नज़रिये से ही काम लें.

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