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भोजपुरी खलनायक जय सिंह का फिल्म टेक्नीशियन्स के लिए पिघला दिल

मनोरंजन | अनूप नारायण :
फिल्म इंडस्ट्री में उत्तर भारत से काम की तलाश में आये हुए मुंबई से सटे मीरा रोड, भायंदर, नायगांव, नालासोपारा, वसई, विरार में भाड़े के घरों में रह रहें लाखों टेक्निशियन्स, आर्टिस्टस, बैक स्टेज वर्कर्स जिनका पेट हथेली पर हैं, जो दिहाडी मजदूरी से ही पैसा कमाते हैं। वे रोजाना ₹2000-2500 हजार बमुश्किल से कमा पाते हैं, उन सबका कोरोना वायरस महामारी की वजह से आय नहीं हो पा रही है। बंद पडी फिल्म इंडस्ट्री से उन सभी का काफी आर्थिक नुकसान हो रहा हैं। उन सभी की हालत को जानकर भोजपुरी फिल्मों खलनायक व सोशल वर्कर जय सिंह का दिल पिघल गया है। उन्होंने मांग की है कि सभी टेक्निशियंस, आर्टिस्टस, बैक स्टेज वर्कर्स नालासोपारा, वसई, विरार आदि जगहों पर भाड़े से घर लेकर रह रहे हैं। उनका जो भी नुकसान हो रहा हैं, उसकी मदद भारत सरकार/महाराष्ट्र सरकार को "स्पेशल पॅकेज" के जरिये करना चाहिए।  फिल्म इंडस्ट्री से भारत सरकार/महाराष्ट्र सरकार को महीने में लाखों, करोडों रूपया का रेव्हन्यू मिलता हैं। जो बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं, प्रस्थापित अभिनेता, अभिनेत्रियां हैं, प्रस्थापित टेक्निशियनस आदि हैं, उनकी आमदनी पर इतना असर नहीं होगा लेकिन जो अस्थाई रूप से काम पाते हैं, वे लोग महीनों से घर में बैठे हैं, उन लाखों टेक्निशियनस, आर्टिस्टस, बैक स्टेज वर्कर्स और उन पर निर्भर परिवार को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता हैं। आमदार सुभाष धोटे
राजुरा, चंद्रपुर के पीए विलास भांबेडकर ने भी मांग करते हुए जताया कि सरकार से हमारी अपील है कि फिल्म क्षेत्र में कार्यरत संघटनो से उन सबका डाटा लेकर उनकी स्थिति का जायजा लिया जाय और इन सभी लोगों के लिये जल्द ही स्पेशल पैकेज घोषित किया जाय। संभव हो सके तो कम्युनिटी किचन के जरिये घर पर बेरोजगार होकर बैठे उन टेक्निशियन्स, आर्टिस्टस, बैक स्टेज वर्कर्स और उन पर निर्भर परिवार के लिये टिफिन सुविधा उपलब्ध कराई जाय।