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पटना : पत्रकार-कवि सम्मेलन Season-2 का हुआ आयोजन


पटना [अनूप नारायण] :
बोलो ज़िन्दगी फाउंडेशन ने रविवार को पटना,दीघा स्थित पिंक महल मैरेज हॉल में "पत्रकार कवि सम्मेलन- Season 2" का आयोजन किया, जहाँ शहर के विभिन्न प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कवि पत्रकार बन्धुओं ने काव्य पाठ के साथ नए साल का स्वागत किया.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अमिताभ ओझा, एसोसिएट एडिटर, न्यूज 24 (बिहार-झाड़खंड), विशिष्ट अतिथि - पवन टून, कार्टूनिस्ट, दैनिक हिंदुस्तान,
बंटी चौधरी, विधायक, सिकंदरा- जमुई, प्रभंजन सिंह, सीएमडी, नेक्स्टजेन वर्ल्ड, मृत्युंजय कु. सिंह, प्रदेश अध्यक्ष, बिहार पुलिस एसोसिएशन अनिमेष रंजन येलो स्टुडिओ  ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की. कार्यक्रम में विशेष अतिथि ऋतु जायसवाल,  गुड्डू बाबा , अनिल दत्त , सुजीत कुमार, श्वेता श्रीवास्तव, कृतिका गुप्ता और सुजीत श्रीवास्तव उपस्थित रहे
कार्यक्रम की शुरुवात में बोलो ज़िन्दगी फाउंडेशन के निदेशक राकेश सिंह 'सोनू' एवं बोलो ज़िन्दगी की प्रोग्रामिंग हेड तबस्सुम अली ने आमंत्रित अतिथियों को सम्मानित किया.

काव्य सम्मेलन में 12 पत्रकार कवियों ने अपनी काव्य रचना सुनाई. जिनमे अमलेंदु अस्थाना ने सुनाया-
"शब्द शब्द टकराये है,
देखो तो किधर जाए है.
नफ़रत की इस आंधी में
शोला वोला भड़काए है.
कोई मज़हब-मज़हब शोर करे
कोई जाति-जाति चिल्लाए है."

कुमार रजत ने सुनाया-
"ज़िद ने साजिश बड़ी की है।
घर में दीवार खड़ी की है।
हम यूं कभी रोए नहीं थे
मुहब्बत ने कहीं गड़बड़ी की है।"

चंदन द्विवेदी ने सुनाया-
"राग हो रंग हो इस नए साल में
साथ हो संग हो इस नए साल में
सबको विज्ञान देता रहे सन्मति
न कोई जंग हो इस नए साल में."

प्रेरणा प्रताप ने सुनाया-
"कौन सी कविता लिखूं ,
लिखूं कौन सा गीत,
स्याही अश्रु बहा रही
जब हृदय हुआ व्यथित."

समीर परिमल ने सुनाया-
"जो न करना था कर गया पानी
देखो हद से गुज़र गया पानी
जब जगह मिल सकी न आँखों में
हर गली घर में भर गया पानी."

आरजे श्वेता सुरभि ने सुनाया-
"कुछ ख्वाहिशें झांकती है झरोखों से..कुछ हसरतें दस्तक देती हैं खिड़कियों पर.."

अभिषेक कु. मिश्रा ने सुनाया-  "अगर मैं लड़की होता को क्या लिखता...मैं अपना डर लिखता या अपना गुस्सा लिखता."

राकेश सिंह 'सोनू' ने सुनाया-
"तेरे आने से तब मौसम बदलता था तेरे जाने से अब मेरी रात जगती है...क्या बताऊँ, मेरी आदत बनकर तू अब भी मुझमे दिन-रात गुजरती है."

बीरेंद्र ज्योति जी ने सुनाया-
"नया साल मुबारक नया साल मुबारक. उसको नफरत की आग मुबारक हमें इश्क का एक चिराग मुबारक."

संजीव कुमार मुकेश ने सुनाया, "जीवन के हर शब्द-शब्द अक्षर-अक्षर में माँ, माँ ही गीता-वेद-रामायण वाणी स्वर में माँ."

ऋचा शर्मा, फर्स्ट बिहार-झाड़खंड न्यूज पोर्टल, ने सुनाया-
"चाहत नहीं विवाद हो
आदत नहीं फसाद हो
है तीव्र लालसा यही
बस सत्य शंखनाद हो."

श्रीकांत व्यास ने सुनाया -
"दस्त में हैं मौत के ख़ंजर लिए,
बागवां भी अब दिखे बंजर लिए..."
कार्यक्रम में एंकरिंग की प्रीतम कुमार ने तो कवि सम्मेलन की अध्यक्षता की चंदन द्विवेदी ने.

आमंत्रित पत्रकार कवि -
अमलेंदु अस्थाना, दैनिक भास्कर
चंदन द्विवेदी, दैनिक हिंदुस्तान
कुमार रजत, दैनिक जागरण
श्वेता सुरभि, आरजे, बिग एफएम
अभिषेक मिश्रा, रेड एफएम
प्रेरणा प्रताप, दूरदर्शन बिहार
बीरेंद्र ज्योति, वरिष्ठ पत्रकार
श्रीकांत व्यास, वरिष्ठ पत्रकार
समीर परिमल, पूर्व संपादक, सामयिक परिवेश
संजीव मुकेश, संपादक, सामयिक परिवेश
मुकेश सिन्हा, पूर्व पत्रकार
ऋचा शर्मा, फर्स्ट बिहार झाड़खंड न्यूज पोर्टल.

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बोलो ज़िन्दगी के प्रीतम कुमार एवं तबस्सुम अली, दीपक, नीरज व सतीश कुमार , राहुल राज, दीनू मिश्रा का बहुत योगदान रहा. कार्यक्रम के अन्य सहयोगी थें रिलेक्स सर्विकॉन प्राइवेट लिमिटेड, येलो स्टूडियो, नेक्स्ट जेन वर्ल्ड, सत्तूज़.