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गिद्धौर : दिग्विजय सिंह के 9वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित

[न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा ] :-

दिग्विजय सिंह का नाम आते ही एक दिव्य चेहरा बरबस ही नजर के सामने आ जाता है।
24 जून 2010 ये वो तारीख है, जब गरीबों के पुरोधा कहे जाने वाले विकासपुरुष पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह (दादा) ने आखिरी सांस ली थी।


  सोमवार को इनकी 9वीं पुण्यतिथि पर वो स्थान गुलजार दिखा जहां इन्हें पंचतत्व में विलीन किया गया था। पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आगंतुकों द्वारा समाधि स्थल एवं दादा के आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए स्व. दिग्विजय सिंह के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर चर्चा की एवं भारतीय राजनीति तथा समाज के लिए उन्हें आदर्श व्यक्ति बताया।
कारण ये था कि अपने निकटम लोगों के बीच दादा के नाम से पहचाने जाने वाले दिग्विजय सिंह ने राजनीति के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में अपनी पहचान विकास पुरुष के रूप में बनाई। गिद्धौर के नयागांव में जन्म लेने वाले दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए भारतीय राजनीति पर विशेष पकड़ स्थापित की थी। ब्रेन हेमरेज से असमय काल-कवलित होने वाले बेहद लोकप्रिय शख्सियत दिग्विजय सिंह की 9वीं पुण्यतिथि गिद्धौर प्रखंड के कुंधुर पंचायत अंतर्गत नयागांव के नागी-नकटी कटहरा नदी तट पर स्थित उनके समाधि स्थल पर श्रद्धाभाव के साथ पारिवारिक सदस्यों, राजनेताओं, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों एवं उनके चाहनेवालों ने श्रद्धा-सुमन के पुष्प अर्पित कर मनाया। 

इनमें बांका पूर्व सांसद व उनकी पत्नी पुतुल कुमारी, लोजपा के युवा जिलाध्यक्ष राष्ट्रदीप सिंह, भतीजे चंदन सिंह, पूर्व मंत्री दामोदर रावत, रतनपुर पंचायत के मुखिया रावल सावंत सिंह, सांसद प्रतिनिधि जीवन सिंह, मौरा पंचायत के मुखिया कामता प्रसाद सिंह, डॉ. शशिशेखर प्रसाद, समाजसेवी भवानन्द, सूर्यवत्स, शिक्षाविद लक्ष्मण झा, गिद्धौर सेंट्रल स्कूल के निदेशक अमर सिंह, पूर्व जिप अध्यक्ष बह्मादेव रावत, प्रखंड प्रमुख शम्भू केशरी, विनोद यादव, डब्लु पंडित, गिद्धौर पैक्स अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकू साव के अलावे सैंकड़ों की संख्यां में लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। 


सोमवार की अहले सुबह से ही साफ़-सफाई व सजावट का कार्य शुरू हुआ। सुगन्धित फुलों से दिग्विजय सिंह की समाधी व आदमकद प्रतिमा को सजाया गया था। प्रातः  7 बजे से ही समाधि स्थल पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था।जमुई, झाझा, गिद्धौर सहित दूर-दराज के इलाके के लोग अपने प्रिय नेता के पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने नयागांव पहुंचे।



[श्रद्धांजलि सभा में कम होते जा रहे हैं हाजरी लगाने वाले लोगों की संख्या]

वर्ष 2010 में जब दिग्विजय सिंह का देहांत हुआ था, इसी स्थल पर जन सैलाब देखा गया था। भीड़ इतनी थी कि काफी मशक्कत के बाद लोग दादा के अंतिम दर्शन कर पाए थे। वर्ष 2011 में उनकी पहली पुण्यतिथि पर जमुई और बांका लोकसभा के अलावे हज़ारों की संख्या में दूर-दराज से लोग समाधि स्थल तक पहुंचे थे। लेकिन, साल दर साल होने वाले इस पुण्यतिथि में लोगों की उपस्थिति में आई कमी से ऐसा प्रतीत होने लगा है कि धीरे धीरे लोग 'दादा' को अब अपने यादों तक ही सीमित करते जा रहे हैं। दुर्भाग्य की बात है कि लोग ऐसे जननेता के 9वीं पुण्यतिथि पर जनसमूह का रूप लेकर उपस्थित नहीं हो पाए। जहां एक समय मे लोगों का हुजूम लगता था वहीं आज लोगों की उपस्थिति में अप्रत्याशित कमी देखी गयी।



[व्यस्त दिनचर्या से धुंधली हो रही है दादा की यादें]

भले ही दादा की जन्मभूमि गिद्धौर रही हो लेकिन उन्होंने अपनी राजीनीति कर्मभूमि बांका को बनाया। इसके बावजूद जहां पिछले वर्षों तक बांका से भी उनके चाहने वाले लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने नयागांव तक आते थे, उनकी संख्या भी नगण्य होने लगी है।
एक समय था जब दिग्विजय सिंह के रहने पर लोग उनसे भेट मुलाकात करने व हाजरी लगाने गिद्धौर के लाल कोठी पहुँचते थे, वो आज अपने दैनिक कार्यों में इस कदर व्यस्त हो गए हैं कि कइयों को ये स्मरण भी नहीं होगा कि दादा के इस दुनिया से गये हुए लगभग एक दशक बीतने को है। आज यदि दिग्विजय सिंह रहते तो गिद्धौर की तस्वीर ही कुछ और होती।
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