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बांका : बढ़ते गर्मी से गहराया पेयजल संकट, पढ़िए विभिन्न गांवों की ग्राउंड रिपोर्ट

धोरैया (बांका) | अरुण कुमार गुप्ता】:-

गर्मी की दस्तक के साथ ही गावों में पेयजल संकट गहराने लगा है। भू-जल स्तर गिरने से प्रखंड के 50 से अधिक गांवों के चापाकल पानी छोड़ चुके हैं तो कई विभाग की लापरवाही के कारण  रख रखाव के अभाव में खराब पड़ा हुआ है।
हालांकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार अबतक 55 चापानल को ठीक कराया गया है, लेकिन आज भी ग्रामीणों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। 

ग्रामीण कह रहे हैं, अभी तो गर्मी शुरू हुई है जेठ का महीना अभी बांकी है, बहुचर्चित गाना 'जेठ की दुपहरी में पांव जले है'... की अभी शुरुआत नही हुई है, पानी का जल्द समाधान  नहीं हुआ तो क्षेत्र में हाहाकार मच जाएगा।
विभागीय आकड़ा के मुताबिक प्रखंड क्षेत्र में 286 वार्ड केे 104 वार्ड में पीएचडी मुखिया व वार्ड क्रियान्वयन समिति के द्वारा नलजल का कार्य कराया गया है। लेकिन एक दो पंचायत को छोड़कर मुख्यमंत्री सात निश्चिय योजना के तहत हर घर नल का जल पुहंचने के बाद भी लोगों का पानी नही नसीब नही हो पा रहा है।
वहीं प्रखंड क्षेत्र के बटसार एवं काठबनगांव-बीरबलपुर पंचायत में विश्व बैंक से निर्मित जल मिनार से लोगों को पानी दिया जाना था लेकिन अबतक विश्व बैंक के द्वारा भी सभी गांवों में नल जल नही पहुंच पाया है।
बटसार पंचायत में तीन जल मिनार को निर्माण होना है लेकिन अभीतक सीर्फ एक जलमिनार का निर्माण हो सका है जिसे वार्ड 7,8,9,10,11,12 एवं 13 के लोग लाभावन्ति हो रहे है। लेकिन शुद्ध जल इन लोगों का भी नसीब नही हो पा रहा है। वहीं अस्सी और भुसार में जलमिनार बनना अभी बांकी है जिससे शेष बचे 8 वार्ड के लोगों को पानी मिलेगा। वहीं कठबनगांव बिरबलपुर पंचायत में 4 जलमिनार विश्वबैंक से बनना है लेकिन वहां भी सीर्फ एक जलमिनार अठपहरा गांव में बना है शेष तीन बनना अभी बांकी है।


वहीं गेरूआ नदी से सटे बटसार पंचायत के बलमचक गांव में नल-जल का पानी नही होने के कारण गांव की महिलायें पानी की समस्या से परेशान है। गांव में 8से 10 सरकारी चापानल है लेकिन अधिकांश की हालत खस्ता है कई बार चलाने के बाद उससे पानी निकल पाता है तो 5-6 चापानल खराब पड़ा है। चापानल से पानी नही निकल पाने के कारण गांव की महिलायें पटवन के लिए खेतों में चल रहे बोरिग से पानी लाकर प्यास बुझा रही है, लेकिन इनकी समस्याओं पर किसी भी जनप्रतिनिधियों और न ही अधिकारियों का ही ध्यान है,जिससे गांव की कुल 3 हजार आबादी पानी के लिए त्राहिमाम कर रही है।
इस बाबत ग्रामीण महिला  जुबेदा खातन, सबाना खातुन, रूकसाना खातुन, अमीषा खातुन, यास्मीन, आसीफ, अफसाना, तयबुल खातुन, जुल्फकार सहीत दर्जनों महिलाओं ने बताया कि एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर स्थिति बाजार गांव में विश्व बैंक की राशि से निर्मित जलमीनार के चलने से आसपास गांव में पानी का लेयर नीचे चला गया,जिससे गांव में लगे चानापल पानी नही उगल रहा है।
कुछ ऐसा ही हाल पंचायत के नंदगोला और भुसार गांव में है। 12 सौ की आबादी वाले नंदगोला गांव में मात्र चार चापानल है तो भुसार की जनसंख्या 800 के कारीब चापानल 3 है जिससे बलमचक गांव के साथ साथ इन दोनों गांवों में भी पानी के लिए यहां त्राहिमाम मचा है।


क्या कहना है मुखिया का】:-

इस संदर्भ में बटसार के मुखिया रजनीश कुमार कहते हैं कि कई बार पदाधिकारी को पानी की समस्या से अवगत कराया गया है वहीं पीएचडी विभाग को खराब पड़े चापानल को ठीक कराने के लिए कहा गया है। लेकिन अश्वासन के सिवा अबतक कुछ नही मिला है। जिससे पंचायत के कई गांवो के लोगों को पानी की समस्या से जुझना पड़ रहा है।

कहते हैं बीडीओ】:-

धोरैया के बीडीओ अभिनव भारती से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि इन दोनों पंचायत में विश्वबैंक के द्वारा कार्य होना है। शेष सभी पंचायतों में नल जल योजना को तेजी से कार्यान्वित कराया जा रहा है।