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मंगलवार, 30 अप्रैल 2019

गिद्धौर : तपती गर्मी की शुरुआत में ही सूख गए जलस्रोत, परेशानी में लोग



【गिद्धौर| गुड्डू वर्णवाल 】[Edited by: Aprajita] :-

अभी मई-जून की तपती गर्मी बाकी ही है और कुएं-चापाकल व अन्य जलस्रोत अभी से ही सूखने लग गए हैं। इसका एक बड़ा कारण बिहार में बारिश की कमी की समस्या भी है। जहाँ डेढ़ दशक पहले 1200-1500 मिमी बारिश होती थी, वहाँ अब करीब पिछले 10 वर्षों से 800 मिमी से थोड़ी अधिक बारिश हो रही है। कम बारिश होने से जमीन के अंदर कम पानी जा रहा है।
वह दिन दूर नहीं जब बिहार जल संकट वाले राज्यों में एक होगा। आज पूरा राज्य अपनी जल-जरूरतों की पूर्ति के लिए सबसे ज्यादा भू-जल पर ही निर्भर है। लिहाजा, एक तरफ भू-जल का अनवरत दोहन हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ औद्योगीकरण के चलते हो रहे प्राकृतिक विनाश, पेड़-पौधों व पहाड़ों की हरियाली आदि में कमी आने के कारण बरसात में भी काफी कमी आ गई है। परिणामत: धरती को भू-जल दोहन के अनुपात में जल की प्राप्ति नहीं हो पा रही है। सीधे शब्दों में कहें तो धरती जितना जल दे रही है, उसे उसके अनुपात में बेहद कम जल मिल रहा है। बस यही वह प्रमुख कारण है जिससे कि भू-जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
बात करें गिद्धौर की तो यहां का हाल भी कुछ इस तरह ही है। मालूम हो कि उलाई नदी के तट पर बसे इस गाँव मे वर्षों पहले पानी की ऐसी किल्लत कभी नही देखी गयी। आज पूरा प्रखंड पानी की कमी की समस्या से जूझ रहा है। तालाब और कुएं की बात करें तो वो कब के सूख गए हैं। लिहाजा लोगों की आस चापाकल पर आ टिकी है, लेकिन अब वो भी सुखने लगे हैं। नये जमाने के  मोटरपम्प में भी पानी की भारी कमी आई है।
gidhaur.com की टीम अपने सुधि पाठकों से आग्रह करती है कि यथासंभव पानी बचाने की मुहीम में अपना योगदान दें।

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