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शुक्रवार, 12 अक्टूबर 2018

कैमूर की वादियों में विराजती हैं मां ताराचंडी



शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा के शक्तिपीठों के पावन दर्शन कराने gidhaur.com आज आपको सासाराम के मां ताराचंडी के दरबार ले चल रहा है।
बिहार के ऐतिहासिक शहर सासाराम शहर से दक्षिण में कैमूर की पहाड़ी की मनोरम वादियों में मां ताराचंडी का वास है। ताराचंडी के बारे में स्थानीय लोगों का मानना है कि ये 51शक्तिपीठों में से एक है। कहा जाता है कि सती के तीन नेत्रों में से भगवान विष्णु के चक्र से खंडित होकर दायां नेत्र यहीं पर गिरा था। तब यह तारा शक्ति पीठ के नाम से चर्चित हुआ। कहा जाता है कि महर्षि विश्वामित्र ने इसे तारा नाम दिया था। दरअसल, यहीं पर परशुराम ने सहस्त्रबाहु को पराजित कर मां तारा की उपासना की थी। मां तारा इस शक्तिपीठ में बालिका के रूप में प्रकट हुई थीं और यहीं पर चंड का वध कर चंडी कहलाई थीं। यही स्थान बाद में सासाराम के नाम से जाना जाने लगा।

मां की सुंदर मूर्ति एक गुफा के अंदर विशाल काले पत्थर से लगी हुई है। मुख्य मूर्ति के बगल में बाल गणेश की एक प्रतिमा भी है। कहते हैं कि मां ताराचंडी के भक्तों पर जल्दी कृपा करती हैं। वे पूजा करने वालों पर शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालु नारियल फोड़ते हैं और माता को चुनरी चढ़ाते हैं।

चैत्र और शरद नवरात्र के समय ताराचंडी में विशाल मेला लगता है। इस मेले की सुरक्षा प्रशासनिक स्तर पर की जाती है। रोहतास जिला और आसपास के क्षेत्रों में माता के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा है। बुजुर्गों का कहना है कि गौतम बुद्ध बोध गया से सारनाथ जाते समय यहां रूके थे। वहीं सिक्खों के नौंवे गुरु तेगबहादुर जी भी यहां आकर रुके थे।


मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण- 

कभी ताराचंडी का मंदिर जंगलों के बीच हुआ करता था। पर अब जी. टी. रोड का नया बाइपास रोड मां के मंदिर के बिल्कुल बगल से गुजरता है। यहां पहाड़ों को काटकर सड़क बनाई गई है। ताराचंडी मंदिर का परिसर अब काफी खूबसूरत बन चुका है। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए बेहतर इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में कई दुकानें भी हैं। मंदिर के पास अब विवाह स्थल भी बन गए हैं। आसपास के गांवों के लोग मंदिर के पास विवाह के आयोजन के लिए भी आते हैं।

मंदिर खुलने का समय -

मां ताराचंडी का मंदिर सुबह 4 बजे से संध्या के 9 बजे तक खुला रहता है। संध्या आरती शाम को 6.30 बजे होती है, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालु गण बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। मंदिर की व्यवस्था "बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद" देखता
है। 

ऐसे पहुंचे माता मंदिर–
 ताराचंडी मंदिर की दूरी सासाराम रेलवे स्टेशन से 6 किलोमीटर है। रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने के लिए तीन रास्ते हैं। बौलिया रोड होकर शहर के बीच से जा सकते हैं। 

एसपी जैन कालेज वाली सड़क से या फिर शेरशाह के मकबरे के बगल से करपूरवा गांव होते हुए पहुंच सकते हैं। आपके पास अपना वाहन नहीं है तो सासाराम से डेहरी जाने वाली बस लें और उसमें मां ताराचंडी के बस स्टाप पर उतर जाएं।

माँ चंडी आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करें। जय माता दी।

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