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बुधवार, 27 जून 2018

झारखंड : लातेहार में नक्सली लैंड माइंस ब्लास्ट में 6 जवान शहीद, 5 घायल

ब्रेकिंग : लातेहार जिले के छिपादोहर थाना क्षेत्र स्थित बूढ़ा पहाड़ में सर्च अभियान के दौरान नक्सलियों ने आइइडी ब्लास्ट कर पुलिस वाहन को उड़ा दिया. घटना में झारखंड जगुआर (जेजे) के छह जवान शहीद हो गये. जबकि पांच घायल हो गये.

इसमें से एक की स्थिति गंभीर है. घायलों को इलाज के लिए हेलीकॉप्टर मौजूद नहीं होने के कारण रांची की जगह मेदिनीनगर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे की है. जिस जगह नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाया, वह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा से सटा है. डीआइजी विपुल शुक्ला ने इसकी पुष्टि की है.

सूचना के बाद निकली थी पुलिस
जानकारी के अनुसार, रविवार को बारेसाढ़ थाना क्षेत्र के कुजरूम में पुलिस और नक्सलियों की बीच मुठभेड़ हुई थी.

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने इलाके में बूढ़ा पहाड़ के इलाके में सघन सर्च आॅपरेशन शुरू किया था. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली थी कि कुजरूम में करीब 30 की संख्या में माओवादियों का दस्ता मौजूद है. इसी सूचना के बाद पुलिस नक्सलियों की तलाश में निकली थी. करमडीह पुलिस पिकेट से कुछ ही दूरी पर 100 की संख्या में मौजूद नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दिया. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की. इसके बाद नक्सली पीछे हट गये.

पुलिस के जवान नक्सलियों का पीछा करते हुए जैसे ही आगे बढ़े लैंड माइंस ब्लास्ट कर गया. पुलिस नक्सलियों के बिछाये जाल में फंस गयी. घटना की एक वजह यह भी बतायी जा  रही है कि नक्सलियों की संख्या की तुलना में पुलिस की तैयारी और खुफिया  जानकारी नाकाफी थी.

वाहन के परखचे उड़े 
लैंड माइंस ब्लास्ट में पुलिसकर्मियों के वाहन के परखचे उड़ गये. छह जवानों की मौके पर ही मौत हो गयी. घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. घटनास्थल के आसपास घने जंगल होने के कारण अतिरिक्त जवानों को मौके पर पहुंचने में कुछ विलंब हुआ. घायल पांच जवानों  को किसी तरह मेदिनीनगर लाया गया.

आलाधिकारियों के गलत नीति के कारण जवानों की जान जाती है
वरीय पदाधिकारियों के गलत नीति और  लापरवाही के कारण झारखंड पुलिस के जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है. मुझे छह जवानों के शहीद होने और कई के घायल होने की जानकारी  मिली है. सीनियर अधिकारी  एयरकंडीशंड ऑफिस में बैठ कर पुलिसकर्मियों को छापामारी अभियान में  भेज देते हैं.  उनके पास मुठभेड़ में कैसे नक्सलियों और उग्रवादियों से निबटे, वहां से जवान कैसे सुरक्षित लौंटेंगे इससे संबंधित कोई प्लानिंग नहीं होता.
~ राकेश पांडेय, प्रदेश उपाध्यक्ष, पुलिस मेंस एसोसिएशन

अनूप नारायण
27/06/2018, बुधवार

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