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सोमवार, 29 जनवरी 2018

बिहार की बेटी को सलाम, कुवैत छोड़ बिहार को बनाया कर्मभूमि

Gidhaur.com (विशेष) : सफल होने की चाह इंसान को सात समंदर पार ले जाती है। सफल लोग कम ही अपनी जन्मभूमि का कर्ज उतारने वापस लौटते हैं। इस मिथक को तोड़ा है सफल महिला उद्यमी व फिल्म निर्मात्री साधना सिंह ने।

साधना मूल रूप से बिहार के राघोपुर जिला वैशाली की है। इनकी शादी वैशाली के हाजीपुर निवासी इंजीनियर राजेश कुमार सिंह से हुई है, जो कुवैत में सेटल हैं।

साधना की स्कूली शिक्षा जमशेदपुर टाटानगर से हुई है। इन्होंने विधि स्नातक एवं फ़ाईन आर्ट की पढ़ाई की है। इनका जन्म एक बड़े प्रतिष्ठत  घराने में क्षत्रिय परिवार में हुआ।

साधना का बचपन सुखद बीता। परिवार से जो चाहा वो मिला। एक आधुनिक विचार वाले माता-पिता दादा-दादी के बीच पालन पोषण हुआ। विधि की पढाई के बावजूद कोर्ट कचहरी इन्हें पसन्द नहीं आया जिसके बाद इन्होंने वकालत छोड़ दी और कला के तरफ़ रूख मोड़ दिया। जिसके बाद कैमरे के साथ रहने और पेंटिंग करने में कब सुबह और शाम हुई पता ही नहीं चला।

साधना का दयालु स्वभाव होने के कारण लोगों को सहायता करना बहुत अच्छा लगता था। लेकिन लोगों की सहायता करने के लिए धन की ज़रूरत पड़ी तब उन्होंने अपने कला को उद्योग में परिवर्तित कर दिया और फ़िल्म मेकिंग और फ़ैशन को मुख्य व्यवसाय बनाया।

साधना आज पेरिस, कुवैत, नागपुर और पटना में फ़िल्म और फ़ैशन दोनो उद्योग चला रही हैं।  उसी पैसे से इनजे दो एनजीओ और ट्रस्ट चल रहे है। साधना सिंह का सोचना है कि पैसा आएगा नहीं तो पैसे बाटूँगी कैसे? इसीलिए जी तोड़ मेहनत करती हूँ और उस पैसे से ख़ूब आनंद लेकर ज़रूरत मंदों की सहायता करती हूँ।

दर्जन भर हिन्दी-अँग्रेजी व क्षेत्रिय भाषा की फिल्मों का निर्माण कर चुकी साधना बिहार को पूरी तरह से अपनी कर्म भूमि बना चुकी है। इनका सरल व्यवहार इन्हे भीड़ से अलग करता है।

अनूप नारायण
पटना      |     29/01/2018, सोमवार

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