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सीएए-विरोधी कार्यकर्त्ता और जनतांत्रिक आवाजों पर राजकीय दमन के ख़िलाफ़ हुआ अररिया में विरोध

अररिया : पिछले दो महीनों में दिल्ली पुलिस ने जामिया के छात्र सफूरा जरगर, मीरान हैदर, आसिफ इकबाल तन्हा, जेएनयू की छात्राएं नताशा नरवाल और देवांगना कलिता व इशरत जहां, खालिद सैफ़ी, गुलफिषा फातिमा, शर्जील इमाम जैसे कार्यकर्त्ता और अन्य सैकड़ों मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से कुछ पर संशोधित यूएपीए के तहत कार्यवाही चलाई जा रही है।
आज पूरे देश भर में राजनैतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने अपना प्रतिरोध दर्ज किया। जन जागरण शक्ति संगठनों के कार्यकर्ताओं ने भी अपने अपने गांव में विरोध के स्वर को ऊंचा किया। लक्ष्मीपुर, कुर्साकांटा में जन जागरण शक्ति संगठन के कार्यकर्ता ने कहा कि सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ खुलेआम दिल्ली में हिंसा भड़काने वाले कपिल मिश्रा, परवेश वर्मा और अनुराग ठाकुर जैसे लोग अभी भी बिना किसी कार्यवाही के खुला घूम रहे हैं। फारबिसगंज में रहने वाले संगठन के कार्यकर्ता पवन कुमार ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि सत्ताधारी ताकतें सभी प्रतिरोध की आवाज़ों को दमन और काले कानूनों के उपयोग से चुप करना चाहती है।'  अररिया के भोजपुर पंचायत से डोली कुमारी ने बोला कि पहले भी सरकार ने भीमा कोरेगांव मामले के बहाने कई लोकतांत्रिक-अधिकार कार्यकर्ताओं को अपनी गिरफ्त में लिया है और उनके खिलाफ कार्यवाही चला रही है।
ऐसे समय में जब लाखों प्रवासी मज़दूरों की आजीविका, खाने - पीने की स्तिथि पर खतरा मंडरा रहा है तब सरकार जनतांत्रिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने में लगी है। रामपुर कोदरकट्टी से जन जागरण शक्ति संगठन की महिला कार्यकर्ता ने कहा कि दलितों, आदिवासियों, श्रमिकों, महिलाओं के हितों के खिलाफ भाजपा सरकार काम कर रही है। ऐसे में इस देश के लोगों को इस दमनकारी शासन को एक आवाज़ में चुनौती देनी होगी।'