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सिमुलतला : मनायी गयी लोकनायक की जयंती समारोह


सिमुलतला ( गणेश कुमार सिंह) :-
  शुक्रवार को जय प्रकाश नारायण उच्च विद्यालय सिमुलतला में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 117वीं जयंती समारोह मनाई गई। समारोह का शुभारम्भ विद्यालय अध्यक्ष कुमार विमलेश, सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ राजीव रंजन एवं बयोबृद्ध समाजसेवी सरला बहन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।


 कार्यक्रम की अध्यक्षता कुमार विमलेश एवं मंच संचालन चन्दन कुमार ने किया। तत्पश्चात सभी अतिथियों ने लोकनायक के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया। इस दौरान विद्यालय के सैकड़ो छात्र छात्राओं को संबोधन करते हुए मुख्य अतिथि हिंदी विश्व विद्यालय देल्ही के प्रोफेसर डॉ केदार मंडल ने कहा कि हमारे राष्ट्र की आजादी के लिए भिन्न भिन्न लोग अलग अलग विचार के साथ जुड़े थे किंतु बिहार की धरती पर जन्म लिए नायक जे पी का विचार उन सब से भिन्न था, उनके विचार के अनुरूप ही भारत बने। वही बयोबृद्ध समाजसेवी सरला बहन जो लोकनायक की अनुयायी रही है उनके मार्गदर्शन पँर चली है और जिनसे विचार से प्रभावित होकर स्वंय लोकनायक सिमुलतला का विचरण किये है, उन्होंने कहा कि जय प्रकाश नारायण राजनीती नहीं लोकनीति के नायक थे। लोकनायक से प्रभावित होकर सरला बहन ने लगभग 40 के उम्र में 1974 में तीन दिन के बिहार बंद के आह्वान पर क्षेत्र के 600 महिलाओं के साथ सत्याग्रह के लिए निकल पड़ी थी, इस दौरान पुलिश ने उन्हें बंदी भी बना लिया था।
वही जे पी के विचारों को सिमुलतला आवासीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ राजीव रंजन ने अपने उद्बोधन में बड़े ही ब्याख्यात्मक ढंग से रखा एवं उनके बिचारो को जीवन में उतारने पँर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जे पी के बिचारों की प्रासंगिकता है कि उन्हें अनंतकाल तक महत्वपूर्ण माना जायेगा, क्योंकि उन्होंने राजनीती को राष्ट्रनीति से जोड़ दिया। अपने 74 वर्ष की बृद्ध उम्र ने संपूर्ण क्रांति का नारा देकर  भारत जैसे बिशाल देश को सुचिता और अखंडता का जोश भर दिया। जयप्रकाश नारायण मार्क्सवाद से प्रभावित होने के बाद भी मार्क्सवादी नहीं बने, वे अहिंसावादी थे फिर गांधीवादी नहीं बने। इसलिये इन विभूतियों से सिख लेते हुए आज के होनहारों को खुद की विचार अपनी धारणाओ के अनुसार ही बनाना चाहिए। 


वही सिमुलतला आवासीय विद्यालय के हिंदी शिक्षक डॉ शुधांशु कुमार ने अपने संबोधन में उपस्थित छात्र छात्रओं को विस्तृत जानकारी दी उन्होंने संपूर्ण क्रांति का तात्पर्य सात प्रकार के क्रांतियों से दिया।एवं सातो क्रांतियों की भी विस्तृत जानकारी देकर यह सिद्ध किया कि उन्हें लोकनायक क्यों कहा जाता है।
 साथ ही उन्होंने एक पंक्ति प्रस्तुत किया -
"दूश्मने हिंद को गरदन न उठाने देंगे
ऐ वतन तुझपे कोई आँच न आने देंगे
ऐ तिरंगा तुझे झुकने न देंगे हरगिज
जान दे देंगे तेरी शान न जाने देंगे"

इस पंक्ति के पूरा होते ही पूरा विद्यालय तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। इस दौरान जयंती समारोह के अवसर पर सैकड़ो छात्र छात्राओं शिक्षक, शिक्षकेतर, एस एस बी के जवान, बीएलओ मनोज यादव, समाजसेवी सह राजद नेता श्रीकांत यादव, समाजसेवी अशोक सिंह सहित दर्जनों अतिथि मौजूद थे।