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गिद्धौर : मां दुर्गा की प्रतिमा का हुआ विसर्जन, दर्शन को उमड़ा जनसैलाब


न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】:-

शंख की ध्वनि से पवित्र होता गिद्धौर का वातावरण, मंदिर परिसर से लेकर कंपनी बाग तक आस्था का उमडता जनसैलाब, और रंग-बिरंगी रोशनी से नहाता हुआ पूरा गिद्धौर.. बिलकुल अद्भुत, अद्वितीय, अनुपम और मनमोहक।
जी हां,  कुछ ऐसा ही अनुभव रहा जब विजयादश्मी के अवसर पर गिद्धौर में स्थापित सुप्रसिद्ध शक्ति की देवी मां दुर्गा को मंगलवार की देर संध्या को गमगीन फिजाओं में आंखों से विदाई दी गई।


दूर दराज से आए मां पतसंडे वाली के दिव्य रूप के दर्शन करने की सबके दिलों की चाहत पूरी हुई। गिद्धौर दुर्गा मंदिर पहुँच कर मां का दीदार कर हर कोई बस प्रार्थना में डूबा नजर आ रहा था। दया, समृद्धि और उन्नति की चाहत से हर कोई गिद्धौर की मां के समक्ष शीश नवाकर अपने परिवार में शांति की कामना करते नजर आ रहा था। 

एक शब्द मे यदि कहें तो, मंगलवार को पूरा गिद्धौर श्रद्धा और उल्लास के रंग में रंगा नजर आया। मां दुर्गा के दरशर्नार्थ गिद्धौर में भक्तों का हुजूम सड़कों पर उतर गया। विजय दशमी पर गिद्धौर में भारी संख्या में लोग मां दुर्गा के दरबार पहुंचे और पूजा-अर्चना की। देखते ही देखते गिद्धौर मेले के माहौल ने सड़कों से लेकर पूरे गिद्धौर का नजारा बदल दिया। 

विसर्जन के दौरान, हजारों श्रद्धालु, पूजा समिति के सदस्य,  गिद्धौर थानाध्यक्ष आशीष कुमार, सहित सैकड़ों पुलिस बल एक साथ विसर्जन मार्ग पर चलते नजर आए।
गौरतलब बात यह है कि स्थानीय प्रशासन की नजर चप्पे चप्पे पर होने से विसर्जन के दरमियां कोई भी असामाजिक तत्व की सक्रियता नहीं देखी गई।


पुलिस प्रशासन की ठोस चौकसी से हजारों श्रद्धालु गण पूरी शालीनता के साथ मां दुर्गा के जयघोष मे डूबे रहे, और मां पतसंडे वाली की प्रतिमा का विधिवत विसर्जन कर दिया गया।

विसर्जन के दौरान, लाॅर्ड मिन्टो टावर चौक से कंपनी बाग तालाब तक सड़क के दोनों किनारे खड़े भक्त हाथ जोड़ गिद्धौर की मां दुर्गा को नमन कर विदा कर रहे थे। इतना ही नहीं बल्कि लोग अपने-अपने घर के छत पर से भी विदा हो रही मां को नमन कर सुख-शांति की याचना कर रहे थे।

मंदिर प्रागंण से प्रतिमा के उठते ही परिसर में सन्नाटा पसर गया। क्योंकि यह तो उल्लेखनीय है कि बीते दस दिनों से शारदीय नवरात्रि को सुबह शाम गिद्धौर के दुर्गा मंदिर  में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु नर-नारियों का जमावड़ा लगा रहता था।
हलांकि, मंदिर मे पसरे सन्नाटे मेले के चकाचौंध में छुपती नजर आ रही थी।