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काँग्रेस राजनीति की रेस से बाहर, अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी लगाई मुहर


अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी को आत्म-निरीक्षण की बात कहकर कॉंग्रेस की कमियों पर मुहर लगा दिया है. अभी सलमान खुर्शीद के बयानों से उठा ज्वार ख़त्म भी नहीं हुआ था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मामले में नया तूल दे दिया है. ऐसे तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सलमान खुर्शीद के बयानों पर प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया, किंतु उन्होंने साफ-साफ यह कह दिया कि वर्तमान में कॉंग्रेस पार्टी जिन स्थितियों से गुजर रही है, उसमें आत्म-निरीक्षण बेहद ज़रूरी है.

सवाल यह भी है कि कॉंग्रेस के बड़े नेताओं द्वारा कॉंग्रेस की कमियों को सार्वजनिक स्तर पर बोलने की ज़रूरत क्यों पड़ी ? ये सवाल तो पार्टी की केंद्र स्तरीय बैठकों में भी उठाए जा सकते थे. क्या कॉंग्रेस पार्टी के भीतर बड़े नेताओं में भी संवादहीनता की स्थिति है, जिस कारण मजबूर होकर बड़े नेताओं को भी मीडिया के माध्यम से अपनी बातें कहनी पड़ रही है ? या कि यह स्थिति भाजपा के कॉंग्रेस मुक्त भारत अभियान की वजह से आई है ?

इससे पहले कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि कांग्रेस की जो स्थिति है, उसमें महाराष्ट्र और हरियाणा चुनाव जीतने की संभावना नहीं है। पार्टी संघर्ष के दौर से गुजर रही है और अपना भविष्य तक तय नहीं कर सकती। पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद ने पार्टी की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा था कि लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल गांधी के इस्तीफे से संकट बढ़ा है। उनके इस फैसले के कारण पार्टी हार के बाद जरूरी आत्मनिरीक्षण भी नहीं कर पायी। हम विश्लेषण के लिए भी एकजुट नहीं हो सके कि हम लोकसभा चुनाव में क्यों हारे.