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मिथिला विकास मंच के कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे बिहार सरकार के मंत्री विनोद नारायण झा

पटना [अनूप नारायण] :
विगत रविवार को बिहार सरकार के लोकस्वास्थ्य विभाग के कैबिनेट मंत्री विनोद नारायण झा अपने दो दिवसीय प्रवास पर पुणे पहुंचे थे, पुणे एयरपोर्ट उनके आगुआई के लिए मिथिला विकास मंच के अध्यक्ष मिहिर झा, संतोष झा, मयूरेश झा साथ में महाराष्ट्र सरकार के लोकस्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी मौजूद रहे। सरकारी विश्रामगृह पहुंच कर महाराष्ट्र सरकार के लोकस्वस्थ्य  विभाग के लोगो के साथ पूर्वनिर्धारित बैठक में हिस्सा लिया।
सरकारी विश्रामगृह में बिहार के बहुत सारे अलग अलग  संगठन के लोग अपनी मांगो को लेके मिले जिसमे मुख्या मांग पुणे दरभंगा के रोजाना परिचालन का था जिसके लिए उन्होंहे हर संभव मदद का भरोसा दिया।
मिथिला विकास मंच पुणे द्वारा मंत्री जी के सम्मान में शहर के पांच सितारा होटल क्रॉउन प्लाजा में रात्रि भोज एवं मैथिल लोगो के स्नेह मिलान का आयोजन किया गया जिसमे मैथिल समुदाय से आने वाले शहर के बड़े उद्योगपति, व्यापारी, सुचना प्रसारण कम्पनी के बड़े अधिकारी, शिक्षाविद ने कार्यक्रम में शिरकत किया। कार्यक्रम में मंत्री जी के साथ बिभिन्न विषयो पर चर्चा किया गया जिसमे में उद्योगपति  शंकर इंडस्ट्रीज के मालिक अजय झा , उद्योगपति आनंद झा, संतोष झा , मयूरेश झा एवं महिला उद्यमी लिली झा ने बिहार के मिथिला छेत्र में अपना उद्योग लगाने की इच्छा जातई।पुणे एवं देश के बहार सुचना प्रसारण कम्पनी  चला रहे सौरभ मिश्रा, हर्षवर्धन मिश्रा ने भी अपने कंपनी की शाखा बिहार में खोलने इच्छा जतायी, मंत्री विनोद नारायण झा ने कहा राजग सरकार में बिहार में व्यपार एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल है आपको जो भी सहयोग चाहिए आप मुझे से सीधे संपर्क कर सकते है।
मंत्री विनोद नारायण झा ने बहुप्रतिच्छित दरभंगा एयरपोर्ट जल्द सुरु होने का आश्वाशन दिया एवं बिहार सरकार द्वारा लोकहित में चलाये जा रहे बिभिन्न योजना की  भी जानकारी दी।
मंच के सदस्यों द्वारा मंत्री विनोद नारायण झा को मिथिला के पारम्परिक पाग दोपट्टा पुष्पगुच्छ दे के सम्मानित किया गया एवं पुणे के ही स्थानीय कलाकार पूजा झा द्वारा बनाया गया मिथिला चित्रकला उन्हें भेंट स्वरुप दिया गया।
कार्यक्रम का अध्यक्षता मिथिला विकास मंच के अध्यक्ष श्री मिहिर झा ने मंच का संचालान सचिव राकेश मिश्रा, वरिस्ट सदस्य शंकर झा एवं डी.आर.डी.ओ. वैज्ञानिक मृदुकान्त पाठक ने किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने की लिए शैलेन्द्र कुमार रॉय, अजय झा, मनोज झा, बालकृष्ण मिश्रा, ललित ठाकुर , रविंद्र झा एवं सरोज झा ने अपना योगदान दिया।