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बांका : नौ दिवसीय रामकथा का हुआ समापन, मनोहारी प्रसंग से मंत्रमुग्ध हुए श्रद्धालु

धोरैया(बांका) | अरुण कुमार गुप्ता】:-

मनीप्लांट का पौधा लगाने से मनी नही होता है , भाग्य में जो लिखा होगा वही होता है। लगाना है तो भगवान राम से भक्ति लगाओ जो आपका उद्धार करेगा। बनाना है तो अपने घर को भक्तिमय बनाओ, जिस दिन कोई महात्मा आकर तुम्हारे दरवाजे पर रूक जायेगा तो आपका भी उद्धार हो जायेगा जिस प्रकार लंका में विभीषण के घर को देख हनुमान रूक गये थे।


ये बातें बटसार पंचायत के खगड़ा गांव में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के अंतिम दिन मंगलवार को सरस रामकथा गायक पूज्य राजन जी महाराज ने भगवान श्री राम के लंका विजय से लेकर अयोध्या में राज्याभिषेक तक का मनोहारी प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि असत्य पर सत्य की सर्वदा विजय होती है। असत्य, अधर्म व अन्याय पर चलने वाला व्यक्ति कितना भी सामर्थ्यवान व शक्तिशाली क्यों न हो, उसका पतन अवश्य होता है।
उन्होंने कहा हनुमान जी ने प्रभु राम से मिलकर सुग्रीव के भाई बाली को परम धाम पहुंचाया, सुग्रीव को राजा और अंगद को युवराज बनाया। भगवान मारने के लिए नहीं तारने के लिए आते हैं कोई काम दुनिया में मुश्किल नहीं अगर श्रीराम का भजन धीरे-धीरे करते रहे।
सुरसा और हनुमान का प्रसंग सुनाते हुए महाराज ने कहा जब राम के आदेश पर हनुमान मैया सीता का पता लगाने लंका जा रहे थे तब रास्ते में सुरसा ने हनुमान का रास्ता रोक अपने मुंह को फैलाने लगी जिसे देख हनुमान ने अपने शरीर के आकार को बड़ा कर लिया तो सुरसा अपने मंुह को और बड़ा करने लगे। इस प्रकार सुरसा ने जब अपना पूरा मुंह खोला तो 100 जोजन अर्थात 12 सौ किलोमीटर खोला तभी रामभक्त हनुमान लघु रूप धारण कर उसके मुंह होते हुए पेट मे चला गया और मुँह बंद होने से पहले बाहर निकलकर हनुमान ने सुरसा से कहा तुम्हारे पेट से बाहर आया हुँ इस कारण तुम मेरी मां हुई क्या अब भी तुम मुझे खाओगी तो सुरसा ने कहा मैं आपको खाने के लिए नही प्रभु की इच्छा से मैं आपके बुद्धि का परिचय लेने आई थी। जाओ और राम के सारे कार्य पूर्ण करो। 
महाराजश्री ने कहा संगत यदि अच्छी होगी तो हमारे सभी कार्य सफल होंगे। भगवान श्रीराम ने सभी को अपना बनाकर प्रेम की एक ज्योति जलाई। कथा में मेघनाथ, कुंभकरण, रावण वध को बताते हुए कहा कि अहंकार अभिमान ज्यादा दिन नहीं चलता, व्यक्ति ने अपने जीवन को सफल बनाने के लिए अहंकार व अभिमान से दूर रहना चाहिए।
महाराज ने कहा हनुमान ने लंका को नही जलाया बल्की रावण के कर्म ने लंका को जलाया है। विभीषण की सलाह पर राम ने रावण की नाभि में बाण मार उसके अमृत को सुखाकर उसका वध कर लंका पर विजय प्राप्त किया। लंका से वापस अयोध्या आने पर भगवान राम का भव्य स्वागत किया गया। दर्शकों की भीड़ के बीच पूरा पंडाल जयकारे से गूंजता रहा। श्रीराम का राज्याभिषेक पे आयोजक ने महाराज को मुकुट बनाकर अभिनंदन किया। वहीं जय श्रीराम के जयघोष से पूरा पंडाल गूंजायमान हो उठा। 
कथा के अंत में  रामकथा के आयोजक प्रदीप कुमार कर्ण नेे कार्यक्रम की पूर्ण सफलता पर सभी भक्तों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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2021 में सनातन धर्म की बंगाल में आयेगी सरकार : राजन जी

नौ दिनों तक राजन जी महाराज ने श्रोताओं को रामकथा के जरिए भक्ति रस में डूबो दिया था। रामजन्मोत्सव से लेकर रावण वध व उत्तरकांड की कथाओं को रोचक ढंग से सुनाया। कथा को घर परिवार से जोड़कर जीवन का उद्देश्य बताने का प्रयास किया। नौ दिन तक उन्होंने घर परिवार, समाज और देश के प्रति कथा के माध्यम से लोगों को कर्तव्य का बोध कराया। पुत्र का माता-पिता के प्रति कर्तव्य से लेकर सास और बहु के रिश्ते पर फोकस किया। जहां महाराज ने लोकसभा 2019 की गिनती की पूर्व संध्या पर कथा के दौरान भारतीय सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखने के लिए भाजपा सरकार आने की बात करते हुए जय श्रीराम के नारे लगवाये थे तो वही कथा के अंतिम दिन महाराज ने 2021 के विधानसभा चुनाव  मंे सनातन धर्म की सरकार बंगाल में बनने की बात कही।

 कथा स्थल पर श्रोताओं के लिए अच्छी व्यवस्था की गई थी। गर्मी के मौसम को देखते हुए आयोजक द्वारा  पूरे पंडाल में पंखा की व्यवस्था की गई थी वहीं पीने के लिए पानी की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई थी। मीडिया, प्रशासन एवं विश्ष्ठि लोगों के लिए अलग अलग दीर्घा बनाया गया था। कथा श्रवण करने आये विश्ष्ठि व्यक्ति को प्रत्येक दिन उपहार भेंट दिया गया। कथा स्थल के पास धार्मिक पुस्तकों व अन्य धार्मिक वस्तुओं के स्टाल लगे थे, जहां अंतिम दिन बहुत भीड़ थी।