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आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है 'मोक्ष की नगरी' काशी

वाराणसी मंदिरों का नगर है. यहाँ हर चौराहे पर एक मंदिर मिल जाता है...


स्टेट डेस्क [अनूप नारायण] :

वाराणसी... वरुणा और अस्सी नदियों का संगम... एक ऐसी नगरी जो मान्यताओं के अनुसार शिव के त्रिशूल पर बसी है ... जो इस धरती की सबसे पुरानी नगरी है और प्रलय काल में भी जो नष्ट नहीं होती बल्कि खुद देवों के देव महादेव इसकी रक्षा करते हैं.मंदिरों का शहर',घाटों का शहर, 'भारत की धार्मिक राजधानी', 'भगवान शिव की नगरी', 'दीपों का शहर', 'ज्ञान नगरी'... न जाने कितने नाम हैं काशी के.कोई इसे अविमुक्त क्षेत्र कहता है तो कोई आनंद-कानन... कोई महाश्मशान तो कोई सुरंधन... कोई ब्रह्मावर्त तो कोई सुदर्शन और रम्य...

इतना रमणीय स्थल शायद ही कोई और हो धरा पर.एक ऐसा शहर जो अपने घाटों के लिए प्रसिद्ध है... जो बनारसी पान के लिए जाना जाता है... जहां की बनारसी साड़ी पूरी दुनिया में मशहूर है... संकरी गलियाँ, यहाँ के सांड मशहूर हैं तो एक वक़्त था जब यहाँ के ठग भी खूब चर्चा में थे.काशी आस्था का केंद्र है, पवित्रता और ज्ञान का केन्द्र है, धर्म और संस्कृति का केन्द्र है... ये सृष्टि की आदिस्थली है.

वाराणसी मंदिरों का नगर है। यहाँ हर चौराहे पर एक मंदिर मिल जाता है... ऐसे सैकड़ों छोटे छोटे मंदिरों के साथ ही यहां ढेरों बड़े मंदिर भी हैं, जो वाराणसी के इतिहास में अलग अलग समय में बनवाये गये... इनमें काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा मंदिर, ढुंढिराज गणेश, काल भैरव, दुर्गा जी का मंदिर, संकटमोचन, तुलसी मानस मंदिर, नया विश्वनाथ मंदिर, भारतमाता मंदिर, संकठा देवी मंदिर, विशालाक्षी मंदिर बेहद प्रसिद्ध और खास हैं।यहां का प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर, बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है ...जो आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र है ...

हिन्दू मान्यता के अनुसार गंगा नदी सबके पाप धो देती है और काशी में मृत्यु सौभाग्य से ही मिलती है और यदि मिल जाये तो व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है । इक्यावन शक्तिपीठ में से एक विशालाक्षी मंदिर यहां स्थित है, जहां भगवती सती की कान की मणिकर्णिका गिरी थी। वह स्थान मणिकर्णिका घाट के निकट स्थित है।

यहां लगभग 84 घाट हैं... जिनमें से पांच घाट बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से 'पंचतीर्थी' कहा जाता है। ये हैं अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट और मणिकर्णिक घाट। अस्सी दक्षिण में स्थित है जबकि आदिकेशवघाट सबसे उत्तर में स्थित हैं।गोस्वामी तुलसीदास ने प्रसिद्ध ग्रंथ रामचरितमानस यहीं लिखा था और गौतम बुद्ध ने अपना पहला प्रवचन यहीं के सारनाथ में दिया था...