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इंटर में सब्जेक्ट को लेकर हैं परेशान! तो पढ़ें ये रिपोर्ट

Gidhaur.com:- हाल ही में मैट्रिक का परिणाम जारी हुआ,अब बच्चे आगे की पढ़ाई को लेकर असमंजस में हैं।उनके दिमाग में कई तरह के सवाल उथलपुथल मचा रहा होता है की इंटर में वह कौन सा विषय रखें,उनकी तैयारी कैसे करें!
 क्या है इनका भविष्य और क्या करें क्या न करें!
तो आज हम इन्हीं सवालों के जबाव  आपके सामने लेकर आये हैं,पढ़ें ये रिपोर्ट।

कहा गया है की समझ और समय दोनों एक साथ बहुत कम लोगों को ही मिलती है और जिसके पास समय और समझ दोनों ही एक साथ हो,उसकी सफ़लता के चांस बढ़ जाते हैं।
अधिकांश छात्रों को ये समझ ही नहीं आता है की वे इंटर में कौन सा विषय चुनें,ये कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है।  हर छात्र इससे अपने जीवन में महसूस करता ही है इसका कारण यह है की इस स्टेज में बच्चे का मानशिक स्तर थोड़ा कमज़ोर होता है और वे स्कूल की दुनिया से तुरंत बाहर निकले होते हैं।
 दसवीं तक सभी विषयों को साथ लेकर चलते हैं और वही उनकी आदत हो जाती है जबकि इंटर में आते ही उनके पास विषयों को चुनने का विकल्प सामने आ जाता है और बच्चे यहीं उलझ जाते है की कौन सा विषय वो चुनें।
अधिकांश छात्र उन विषयों को चुनते हैं जो उनके फ्रेंड ले रहे होते हैं या फिर उनके परिवार वाले उन्हें सजेस्ट करते हैं।
 इस वक्त बच्चे के पास अपने आपको पहचानने का इतनी बौद्धिक शक्ति नहीं होती की वो अपने मन से विषय को लें,वे या तो किसी के दबाब में आकर विषयों का चुनाव करते हैं या फिर किसी  दिखावे या बहकावे में आकर ऐसे विषय ले लेते हैं जो बाद में उनके लिए मुश्किल लगने लगता है।
अब सवाल उठता है की वे कैसे अपने विषय को खुद चुनें आइये जानते हैं।

 कैसे चुनें खुद अपना विषय--

 अक्सर बच्चे विषय चुनने में,द्वन्द में फ़स जाते है इसमें सबसे ज़्यादा उन्हें उनके फ्रेंड्स,रिलेटिव या समाज का दिखावा मज़बूर करता है, वहीं कभी कभी अभिवावक भी बच्चे के ऊपर ज़बरदस्ती दबाब बनाते हैं जिसमें छात्रों को समझ नहीं आता और वो दबाब में कोई भी विषय रख लेते हैं ऐसे में अभिवावक को चाहिए की बच्चों को स्वतंत्र छोड़ दें उन्हें उनके मन की विषय को चुनने की आज़ादी दें उन्हें समझने का प्रयास करें।

 क्या करना चाहिए-

उनसे पूछें की कौन सा विषय पढ़ने में उसे मन लगता है।
ऐसा कहा भी जाता है की
"इंसान दूसरे से झूठ बोल सकता है मगर खुद से कभी नहीं बोल पाता उसका दिल और दिमाग सब जनता है" इसी को ध्यान ने रख कर हर स्टूडेंट्स को चाहिए की वो अपने आपसे बात करे अपने दिल से पूछे की उसका दिमाग सबसे ज़्यादा किस विषय को आसानी से पकड़ता है और किस विषय को पढ़ने में मन लगता है,क्योंकि आपने मैट्रिक में हर विषय को पढ़ा होगा, आपको जिस विषय में मन लगता था उसी विषय को आधार मान कर इंटर में अपना विषय रखें,आप अपने इंट्रेस्ट के हिसाब से साइंस,आर्ट्स,या कॉमर्स रख सकते हैं।

 क्या है विषय का फंडा,किसमें है क्या भविष्य..

बहुत सारे विद्यार्थियों के मन में ये गूँजता रहता है की कमजोर स्टूडेंट्स आर्ट्स लेते हैं और तेज़ स्टूडेंट्स साइंस पढ़ते हैं जबकि बिजनेस करने वाले कॉमर्स को अच्छे से समझ पाते हैं अगर आपके मन में भी ऐसी उलझने हैं तो  आप ये दिमाग से निकाल दीजिये कोई विषय कठिन या आसान नहीं होता कठिन या आसान आपकी मेहनत और रूचि बनाती है।
मान्यताओं की बात की जाए तो कुछ विशेष क्षेत्रों को छोड़ तीनों एक दूसरे के समतुल्य ही मानी जाती है।
बस अंतर होता है तो आपके रणनीति की।

 फोकस्ड,ईमानदार,मेहनती हैं तो 
लें साइंस-

बच्चे साइंस को पहली प्रथमिकता देते हैं यही वज़ह है की इसका डिमांड बच्चों के बीच काफी होता है,लेकिन इस विषय को चुनने से पहले दो बात का ध्यान ज़रूर रखें पहला यह की आपका इस बिषय में रूचि हो और दूसरा यह की आपको मेहनती और ईमानदार होना पड़ेगा तभी आप अच्छे से सफलता पा सकते हैं, हाँ पास होना एक अलग बात है और ज्ञान प्राप्त करना अलग। आप हमेशा ज्ञान के लिए पढ़ें, ज्ञान रहेगा तो पास तो हो ही जायेंगे।
आपको बता दें की साइंस सब्जेक्ट लेने पर आपको physics,chemistry तो रखना अनिवार्य है साथ ही math और biology में से कोई एक विषय रख सकते हैं, अगर आप चाहें तो बायोलॉजी के साथ ही अतिरिक्त विषय के तौर पर मैथ रख सकते हैं।आगे के लिए जान लीजिये की अगर आप math में फेल भी हो गए तो कोई बात नहीं है और अगर math में biology से अधिक अंक आ गया तो यही आपका मुख्य विषय के रूप में अंकपत्र में जुड़ जायेगा।एक बात और इसके लिए आपको कम से कम 3,4 कोचिंग करना पड़ सकता है जिसमें आपको समय तो देना ही होगा।
 क्या हैं अवसर---
साइंस का आगे बहुत फायदा है जैसे आप इंटर में अगर साइंस लेते हैं तो आगे स्नातक में साइंस के साथ साथ आप कोई भी विषय ले सकते हैं,आप आर्ट्स में आ सकते हैं मगर आर्ट्स लेकर साइंस में नहीं जा सकते हैं।
कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं में जैसे एयरफोर्स इत्यादि में सिर्फ साइंस वालों को ही मौका दिया जाता है,साथ ही इंजीनियरिंग या मेडिकल में भी जा सकते हैं जो सिर्फ साइंस वालों के लिए ही होता है।

 ज्ञान के स्तर और वैश्विक ज्ञान बढ़ाना है तो लें "आर्ट्स"--

आर्ट्स बड़ा ही इंट्रेस्टेड और ज्ञान परक विषय है अधिकांश आईएस,आईपीएस इसी सब्जेक्ट से मिलते हैं आर्ट्स में सोशल स्टडीज यानि जो आप मैट्रिक तक इतिहास,भूगोल,राजनीतिशास्त्र,नागरिकशास्त्र,कला इत्यादि विषयों को पढ़ा इन्हीं में से किसी 3 विषय को इंटर में चुनना होता है जो न सिर्फ आपके ज्ञान को बढ़ाता है बल्कि आपको पूरी दुनिया और वैश्विक पटल को जानने समझने का मौका देता है।
आप इस विषय को आसानी से सेल्फ़स्टडी कर भी पढ़ सकते हैं इससे जो समय आपको बचता है उसे अन्य जगहों पर लगा सकते हैं हो सके तो कंप्यूटर सीख लें या स्पोकन की क्लास जॉइन कर लें या डांस सिंगिंग का क्लास भी ज्वाइन कर सकते हैं क्योंकि इसकी पढ़ाई के साथ साथ आपको अलग अलग जगहों पर अपने समय का उपयोग करने का मौका मिल जाता है हो साइंस में नहीं मिल पायेगा।
आर्ट्स सब्जेक्ट को अच्छे से अध्य्यन करने पर आप एक अच्छे विश्लेषक बन सकते हैं और बहुतेरे क्षेत्र में अपना भविष्य बना सकते हैं।

 उपभोक्ता, बाजार,व्यापार में है रूचि तो लें कॉमर्स---

आज का ज़माना बाजार का जमाना है जहाँ सबकुछ बिकता नज़र आ रहा है ये न सिर्फ करियर को लेके अच्छा है बल्कि आपको आत्मनिर्भर भी बनाता है,कामर्स में आपको
1. Accounts
2. Business study (BST)
3.Entrepreneurship (EPS)
इन विषयों का ज्ञान मिलता है जो आपके अंदर एक व्यापार बाजार का ज्ञान में इज़ाफ़ा करता है।
इसकी एक मात्र कोचिंग करने से आप इसे समझ सकते हैं।
अवसर -आने वाला भविष्य कॉमर्स का है और बच्चों की रुझान भी इस विषय को लेकर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है,इस विषय को आगे भी रख कर आप C.A,CS,MBA का कोर्स कर सकते हैं बैंकिंग में भविष्य बना सकते हैं साथ ही ई-कॉमर्स(ऑनलाइन मार्केटिंग)में अपना भाग्य आज़मा सकते हैं।

 तीनों में क्या है आम--

तीनों संकाय में जो आम बात है वो यह की आपको 200 अंक का हिंदी और अंग्रेजी पढ़ना ही पड़ेगा,चाहे आप 150 अंक का हिंदी और 50 का अंग्रेजी रखें या 50 अंक का हिंदी और 150 अंक का इंग्लिश।।आपको तीनों में अनिवार्य रूप से रखना ही पड़ेगा।

अब आप जब भी विषयों को रखें आप इन बातों को ध्यान में रख कर विषय का चुनाव कर सकते हैं जो आपके भविष्य को सवांरने में मदद करेगा।

 रवि मिश्रा
डायरेक्टर
The ज्ञानम् Academy.