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Sunday, 8 December 2019

दिल्ली की फैक्ट्री में भीषण आग, 44 की मौत, दर्जनों घायल, मरने वालों में अधिकतर बिहारी


  • रविवार तड़के 5:22 बजे शॉर्ट सर्किट से आग लगी, ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं
  • स्कूल बैग और खिलौने बनाने की यह फैक्ट्री नई दिल्ली स्टेशन से 3.5 किमी दूर है
  • फैक्ट्री चार मंजिला मकान में चल रही थी, मृतकों में ज्यादातर मजदूर बिहार के रहने वाले

अक्षय कुमार. 
नई दिल्ली. राजधानी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से करीब 3.5 किमी दूर अनाज मंडी के रिहायशी इलाके में चल रही फैक्ट्री में रविवार तड़के 5:22 बजे आग लग गई। उस वक्त फैक्ट्री के अंदर 59 लोग सो रहे थे। इनमें से 44 लोगों की मौत हो गई और कई जख्मी हैं। ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुई। मृतकों में ज्यादातर मजदूर बिहार के रहने वाले थे। 4 मंजिला मकान में चल रही इस फैक्ट्री में शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी थी।क्राइम ब्रांच मामले की जांच करेगा।
दिल्ली पुलिस ने फैक्ट्री मालिक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 10 साल जेल की सजा हो सकती है। फैक्ट्री मालिक फिलहाल फरारहै।घायलों को एलएनजेपी और लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम भी भेजी गई।
फैक्ट्री में प्लास्टिक का सामान रखा था
फैक्ट्री में स्कूल बैग और खिलौने बनाए जाते थे। दमकल विभाग के अफसर सुनील चौधरी ने बताया कि फैक्ट्री में बैग्स, बॉटल और अन्य सामानरखाहुआ था। प्लास्टिक मटेरियल होने की वजह से धुआं ज्यादा हुआ,इसलिएदम घुटने से लोगों की जान गई।

बिजली कंपनी ने क्या कहा
आग बिल्डिंग के आंतरिक सिस्टम में लगी, क्योंकि मीटर पूरी तरह सुरक्षित हैं। बिल्डिंग के सामने से गुजर रहे वायर और पोल भी सुरक्षित हैं। आग बिल्डिंग की दूसरी और तीसरी मंजिल पर लगी, जबकि बिजली के मीटर ग्राउंड फ्लोर पर लगे हैं। आग अगर मीटर से लगती तो ग्राउंड फ्लोर पर लगती, न कि दूसरी और तीसरी मंजिल पर।

बाहर से लॉक था लोहे का दरवाजा
घटना के बारे में फायर सेफ्टी अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों को बचाया गया, उनमें ज्यादातर बेहोशी की हालत में थे, कुछ जख्मी भी थे. 500-600 गज के फ्लोर एरिया में यह फैक्ट्री चल रही थी जिसमें ग्राउंड से ऊपर चार मंजिल बनी थी. इसमें कई तरह की फैक्ट्रियां चलती थीं. बिल्डिंग में स्कूल बैग बनाने और पैकिंग का काम होता था.
फायर सेफ्टी अधिकारी ने कहा, 'जब हम पहुंचे तो देखा बिल्डिंग बाहर से लॉक थी, लोहे का दरवाजा था. अंदर से लोग चिल्ला रहे थे बचाओ-बचाओ. हमलोगों ने गेट तोड़ा और अंदर दाखिल हुए. वहां से लोगों को निकाला और अस्पताल पहुंचाया.' इस बड़ी बिल्डिंग में सीढ़ी एक ही थी. अधिकारी ने कहा, 'हम दरवाजा तोड़कर अंदर गए. वहां जहरीला धुआँ काफी भरा हुआ था. इस वजह से ज्यादातर लोग बेहोशी की हालत में बाहर निकाले गए.

बिना एनओसी चल रही थी फैक्ट्री
फायर सेफ्टी अधिकारी ने कहा कि छत के ऊपर का दरवाजा भी बंद था, जिसे दमकल कर्मियों ने खोला और लोगों को बाहर निकाला. जिस इलाके में फैक्ट्री चल रही थी वह रिहायशी इलाका है और फैक्ट्री को एनओसी भी नहीं मिली थी. यहां जितने मजदूर हैं वे वहीं रहते हैं, वहीं काम करते हैं और वहीं सोते हैं. उधर पुलिस ने हादसे वाली बिल्डिंग के मालिक के भाई को गिरफ्तार कर लिया है. अब सवाल ये उठने लगे हैं कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में काम होता था लेकिन उसे फायर की एनओसी क्यों नहीं दी गई थी.

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