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कोरोना और लॉक डाउन में भयावह हो गई गरीबों की स्थिति : डॉ. केदार मंडल

सिमुलतला | देश भर में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, दिनोदिन संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। कोरोना लॉकडाउन से बहुत सारे काम धंधे बंद हो चुके है, जिसके कारण गरीब परिवार को दो वक्त की रोटी के लिए काफी मशक्कत करना पड़ रहा है। इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत झाझा निवासी डॉ. केदार मंडल पिछले एक सप्ताह से जन जागरण कार्यक्रम के तहत गांव-गांव घूमकर गरीब जरूरतमंद लोगों की हरसंभव मदद कर रहे है। 
श्री मंडल जन जागरण कार्यक्रम के तहत पिछले एक सप्ताह से सिमुलतला के तीनों पंचायत में घूम रहे हैं और लोगों की दुःख दर्द का जायजा ले रहे हैं । इसी क्रम में वह खुरण्डा पंचायत के अमररायडीह गाँव में भी गये और लोगों को जरूरत की सामग्री उपलब्ध कराई। बारिश के दौरान भी वे लगातार गरीबों की मदद में जुटे हुए है। इस दौरान उन्होंने जरूरतमंद लोगों को बीच पाँच किलो चावल और दो किलो आलू का वितरण किया। साथ में मास्क का भी वितरण किया गया।
इस दौरान प्रोफेसर केदार मंडल ने बताया कि कोरोना और लॉक डाउन काल में गरीब मजदूरों की स्थिति बहुत ही भयावह हो गई है, भूखमरी जैसे हालात लोगों के सामने उत्पन्न हो चुके हैं। इनलोगों को काम नहीं मिल रहा है, जॉब कार्ड मिला भी है तो इसके नाम पर गरीब मजदूरों के साथ बहुत बड़ी धांधली हो रही है। बहुत सारे गरीब परिवार का अब तक राशन कार्ड नहीं बना है। आजादी के 70 साल बाद भी गरीबों का राशन कार्ड न बनना बेहद चिंता की बात है और जो प्रशासन और सरकार की विफलता का संकेत है। वही गांव के कुछ गरीब मजदूरों ने बताया कि जॉबकार्ड बिचौलिये लोगों ने रख लिया है और अंगूठे से टीपा लगाकर कुछ चंद रूपया देकर बाकी पैसे का वो बंदरबाँट कर रहे है। इस दौरान कोरोना संकट से त्रस्त लोगो के बीच राहत सामग्री के वितरण से लोगों के चेहरे पर मुस्कान दिखी और सभी ने प्रोफेसर मंडल के सामाजिक कार्य की सराहना की।