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शनिवार, 5 अक्टूबर 2019

धमना : मां दुर्गा की प्रतिमा व अधिष्ठापन का इतिहास राजपरिवारों से जुड़ा है

【न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】 :-

झाझा के धमना गाँव स्थित दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा के पूजा-अर्चना एवं प्रतिमा-अधिष्ठापन का इतिहास राजपरिवारों से जुड़ा रहा है। धमना गांव के 3 पीढ़ी इस मंदिर के गौरवशाली इतिहास के गवाह रह चुके हैं।

बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण सन् 1908 ईस्वी में हुआ था। राजमाता मनियार देवी के फरमान पर कुमार वैद्यनाथ प्रसाद सिंह ने निर्माणकर्ता की भूमिका निभाई थी। मंदिर में पूजा करा रहे आचार्य महेश पाण्डेय बताते हैं कि मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा में काफी यश है। माँ का ये प्राचीन मंदिर क्षेत्र भर के लोगों के लिए आष्था का केन्द्र है। जो भी भक्त सच्चे व निःस्वार्थ भाव से मां की वन्दना करते उनकी सर्वमनोकामनाएँ पूर्ण होती है।


वही मंदिर के यजमान धर्मेन्द्र कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज कुमार  हरिशंकर सिंह एवं गोपाल प्र. सिंह के जमाने से ही यजमानी की परंपरा चल रही है। आज वे खुद इस मंदिर में यजमान के तौर पर पूजा-पाठ की विधि व्यवस्था आदि परम्परा का पूरे नियम-निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं।

सामाजिक संस्था मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के प्रतिनिधि अभिलाष कुमार ने बताया कि धमना स्थित इस दुर्गा मंदिर में गोविंदपुर, खैरान, काषिकुण्ड, टेलियाडीह, दिघरा, सितुचक, मछिन्दरा, छापा आदि दर्जनों गांव से भक्त माँ की दर्शन करने पहुंचते हैं।
विदित हो, प्राचीन काल मे राजघराने से चले आ रहे मां की उपासना एवं राजशाही ठाट-बाट बीते दिनों की बात लगती हो बावजूद इसके हर वर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान राजघराने में विराजने वाली माता के नवरात्र के उत्सव का अंदाज आज भी राजशाही अंदाज में जीवित है।

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