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शुक्रवार, 6 फ़रवरी 2026

गिद्धौर विराट महायज्ञ : रामकथा में सती–शिव संवाद और रामलीला में राम–सीता विवाह ने किया भाव-विभोर

गिद्धौर/जमुई (Gidhaur/Jamui), 6 फरवरी 2026, शुक्रवार : गिद्धौर के ऐतिहासिक पंच मंदिर परिसर के समीप सनातन संस्कृति सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित नौ दिवसीय विराट महायज्ञ अपने आध्यात्मिक उत्कर्ष पर पहुंचता नजर आ रहा है। महायज्ञ के तीसरे दिन बुधवार की देर शाम श्रीधाम वृंदावन से पधारे सुप्रसिद्ध रामकथा प्रवक्ता पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने रामकथा के दौरान भगवान शिव और माता सती से जुड़ी अत्यंत मार्मिक और शिक्षाप्रद कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावलोक में डुबो दिया।

पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने कथा के प्रसंग में बताया कि एक बार भगवान शिव ने माता सती को भगवान श्रीराम की महिमा का वर्णन करते हुए रामकथा सुनाई। जब माता सती ने देखा कि शिवजी वन में भगवान श्रीराम को देखकर उन्हें प्रणाम कर रहे हैं, तो उनके मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि महादेव ने एक वनवासी राजकुमार को नमन क्यों किया। इस जिज्ञासा और संशय को दूर करने के लिए माता सती ने शिवजी से प्रश्न किया, जिस पर महादेव ने उन्हें समझाया कि श्रीराम केवल राजा दशरथ के पुत्र नहीं हैं, बल्कि योगियों के हृदय में निवास करने वाले स्वयं सच्चिदानंद स्वरूप परमेश्वर हैं।

कथा में आगे बताया गया कि संशयवश माता सती ने माता सीता का रूप धारण कर भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने का प्रयास किया। जब शिवजी को इसका आभास हुआ तो वे अत्यंत दुखी और नाराज हो गए। शिवजी ने माता सती को स्पष्ट शब्दों में समझाया कि श्रीराम ही नारायण के अवतार हैं, वही जगत के स्वामी हैं और उनकी परीक्षा लेना अज्ञान और अविश्वास का प्रतीक है। इसी अविश्वास के कारण शिवजी ने माता सती का त्याग कर दिया, जिससे व्यथित होकर माता सती ने अंततः अपने शरीर का त्याग कर दिया। यह प्रसंग सुनते ही पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
रामकथा के दौरान संपूर्ण परिसर “जय श्रीराम” और “हर हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर रामनाम का स्मरण करते और कथा में डूबे नजर आए। कथा के माध्यम से पंडित कृष्णकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि ईश्वर पर संपूर्ण विश्वास और श्रद्धा ही भक्ति का आधार है, जबकि संशय आत्मिक पतन का कारण बनता है।

इधर, महायज्ञ के अंतर्गत आयोजित रामलीला में भगवान श्रीराम और जनकनंदिनी माता सीता के विवाह का भव्य और विहंगम दृश्य मंचित किया गया। विवाह प्रसंग में बारात लेकर आए कलाकारों और जनकपुरी के घरातियों के बीच हंसी-ठिठोली और पारंपरिक संवादों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया। “राम जी से पूछे जनकपुर के नारी, लोगवा देत काहे गारी…” और “चारों दूल्हा में बड़का कमाल सखियाँ…” जैसे लोकप्रिय विवाह गीतों पर दर्शक झूम उठे। वहीं माता सीता की विदाई के दृश्य में महिला श्रद्धालु भावुक होकर आंसू पोंछते नजर आईं।
महायज्ञ के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रतिदिन भव्य भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। आयोजन स्थल पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की भारी भीड़ देखी गई और हर वर्ग के लोग पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम का आनंद ले रहे हैं।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में सनातन संस्कृति सेवा समिति के अध्यक्ष सोनू कुमार, सचिव सुमन कुमार, कोषाध्यक्ष बिट्टू कुमार, सह-कोषाध्यक्ष रॉकी कुमार, उपाध्यक्ष राजेश कुमार उर्फ पाजो जी, सदस्य नीतीश कुमार गट्टू, राम स्वरूप, छोटू कुमार, पवन कुमार, कुणाल कुमार रॉकी, प्रवीण रजक, जॉनी रजक, पिंटू कुमार, संतोष पंडित, सुबोध कुमार सहित अन्य सदस्य पूरे समर्पण भाव से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
समिति के उप सचिव सुशांत साईं सुंदरम ने जानकारी दी कि प्रतिदिन शाम 5 बजे से पंडित कृष्णकांत जी महाराज द्वारा श्रीरामकथा का वाचन किया जा रहा है, जबकि शाम 8 बजे से प्रयागराज की रामलीला मंडली द्वारा भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है। साथ ही प्रतिदिन शाम 7 बजे से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई है। इस विराट आयोजन में राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति भी देखने को मिल रही है।

विराट महायज्ञ और रामलीला के माध्यम से गिद्धौर का संपूर्ण वातावरण इन दिनों सनातन संस्कृति, भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है, जिससे क्षेत्र में धार्मिक चेतना के साथ-साथ आपसी सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश प्रसारित हो रहा है।

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