- वर्ष 2016 से प्रत्येक रविवार जारी है अभियान
- विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण और साइकिल के उपयोग के लिए किया प्रेरित
जमुई/बिहार, 27 सितंबर 2026, रविवार : पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और हरित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘साइकिल यात्रा एक विचार, जमुई’ अभियान की ऐतिहासिक 560वीं साइकिल यात्रा रविवार को सफलतापूर्वक संपन्न हुई। वर्ष 2016 से प्रत्येक रविवार बिना किसी व्यवधान के जारी यह अभियान अब पर्यावरण और सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
प्रखंड परिसर से शुरू हुई यात्रा
560वीं साइकिल यात्रा का शुभारंभ रविवार की सुबह प्रखंड परिसर, जमुई से किया गया। साइकिल यात्रियों का दल पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता से जुड़े संदेशों के साथ लगभग 15 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए राजकीय शुक्रदास प्लस टू उच्च विद्यालय, बरहट पहुंचा। यहां यात्रा का समापन किया गया।
यात्रा के दौरान प्रतिभागियों ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता और हरित जीवनशैली के प्रति जागरूक किया। साइकिल यात्रा के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
20 पौधों का किया गया पौधारोपण
560वीं यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार में उतारते हुए यात्रियों द्वारा 20 पौधों का पौधारोपण भी किया गया। इस दौरान पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल पर भी जोर दिया गया। अभियान से जुड़े सदस्यों ने कहा कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करना भी उतना ही जरूरी है।
वरिष्ठ सदस्य हरेराम सिंह ने लोगों से पौधारोपण को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रकृति के संरक्षण के बिना स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ मौजूदा पेड़-पौधों की रक्षा भी आवश्यक है।
बच्चों में पर्यावरणीय चेतना विकसित करने पर जोर
सक्रिय सदस्य राहुल ऋतुराज ने विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल किताबी शिक्षा प्राप्त करने का केंद्र नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक विद्यार्थी कम से कम एक पौधा लगाने और उसकी नियमित देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने, साइकिल के उपयोग को बढ़ावा देने तथा अपने आसपास स्वच्छ एवं हरित वातावरण तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
साइकिल को स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश
यात्रा के दौरान साइकिल के नियमित उपयोग को भी प्रोत्साहित किया गया। अभियान से जुड़े सदस्यों ने कहा कि साइकिल पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का सरल माध्यम होने के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है। बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच दैनिक जीवन में साइकिल जैसे पर्यावरण-अनुकूल साधनों को अपनाना महत्वपूर्ण है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति बचाने की अपील
सदस्य अजीत कुमार ने कहा कि आज यदि समाज पेड़ लगाएगा और प्रकृति की रक्षा करेगा, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल किसी एक दिन का कार्यक्रम नहीं बनाकर इसे दैनिक जीवन की आदत और सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने की आवश्यकता है।
560 यात्राओं का सफर बना प्रेरणा
‘साइकिल यात्रा एक विचार, जमुई’ की वर्ष 2016 से लगातार प्रत्येक रविवार आयोजित हो रही यात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण और जन-जागरूकता के क्षेत्र में निरंतरता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। 560वीं यात्रा तक पहुंचना इस अभियान से जुड़े लोगों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अभियान के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाता रहा है।
560वीं यात्रा के अवसर पर शेषनाथ सर, संदीप रंजन, अजीत कुमार, हरेराम सिंह, संजय कुमार, राहुल ऋतुराज, रविन्द्र कुमार, अभिषेक आनंद, कादिर आलम, सतीश कुमार, पीटी मुकेश सर सहित अन्य सदस्य एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

