मौरा/गिद्धौर (Maura/Gidhaur), 29 अगस्त 2026, शनिवार : प्रखंड अंतर्गत मौरा पंचायत के बंधौरा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शनिवार को अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में पूर्वाह्न 11 बजे आयोजित इस कार्यक्रम की देखरेख प्रभारी प्रधानाध्यापक रंजीत कुमार शर्मा ने की। संगोष्ठी की थीम ‘खेलो और सीखो’ रखी गई। खेल दिवस के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न खेलकूद गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
खेल और कला आधारित सीखने के महत्व पर चर्चा
संगोष्ठी में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके रचनात्मक एवं व्यक्तित्व विकास में खेल और कला की भूमिका पर चर्चा की गई। शिक्षकों ने कहा कि खेल बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, सहयोग की भावना, नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बच्चों की रचनात्मकता और अभिव्यक्ति पर जोर
कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य अभिभावकों और समुदाय को खेल एवं कला आधारित अधिगम के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। इसके साथ ही बच्चों की रचनात्मक जिज्ञासा, अभिव्यक्ति और सीखने की क्षमता को विकसित करने में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। शिक्षकों ने अभिभावकों से विद्यालय की गतिविधियों में सक्रिय सहयोग करने की अपील की।
बच्चों की स्वच्छता और पौष्टिक आहार पर ध्यान देने की अपील
संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों को बच्चों की दैनिक दिनचर्या और स्वास्थ्य को लेकर भी जागरूक किया गया। अभिभावकों से संकल्प लेने को कहा गया कि वे बच्चों को प्रतिदिन स्नान कराकर, पौष्टिक भोजन खिलाकर और साफ-सुथरे विद्यालयी ड्रेस में नियमित रूप से स्कूल भेजेंगे। शिक्षकों ने कहा कि स्वस्थ एवं स्वच्छ बच्चा ही पढ़ाई और अन्य गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
स्कूल डायरी और गृहकार्य की नियमित निगरानी का आग्रह
अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई में नियमित रुचि लेने की अपील की गई। उन्हें प्रतिदिन घर पर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने तथा स्कूल डायरी देखने को कहा गया। विद्यालय द्वारा दिए गए गृहकार्य के बारे में बच्चों से चर्चा करने और उनके कार्य की जानकारी लेने पर भी जोर दिया गया। शिक्षकों ने कहा कि अभिभावकों द्वारा नियमित निगरानी से बच्चों में पढ़ाई के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
बच्चों की शैक्षणिक प्रगति और व्यवहार पर संवाद
संगोष्ठी में बच्चों की शैक्षणिक प्रगति के साथ उनके व्यवहार और सामने आने वाली समस्याओं पर भी चर्चा की गई। शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई में होने वाली प्रगति से अवगत कराने तथा किसी प्रकार की शैक्षणिक अथवा व्यवहार संबंधी समस्या सामने आने पर मिलकर उसका समाधान करने की बात कही।
घर में पढ़ाई के लिए निर्धारित स्थान बनाने की अपील
अभिभावकों से अपने घर में बच्चों के लिए पढ़ाई का एक निर्धारित ‘पढ़ाई का कोना’ बनाने की अपील की गई। साथ ही बच्चों को प्रतिदिन 15 से 20 मिनट तक बोलकर पढ़ने का अभ्यास कराने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षकों के अनुसार, नियमित रूप से बोलकर पढ़ने से बच्चों के उच्चारण, भाषा कौशल, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता में सुधार होता है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले बच्चों और अभिभावकों को किया गया सम्मानित
संगोष्ठी के समापन अवसर पर बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए वर्गवार बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को ‘स्टूडेंट ऑफ द मंथ’ के रूप में सम्मानित किया गया। वहीं विद्यालय की गतिविधियों में विशेष सहयोग करने वाले अभिभावकों को ‘पैरेंट ऑफ द मंथ’ के रूप में सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों को भी विद्यालय की शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना रहा।
शिक्षक और अभिभावकों ने लिया सक्रिय भाग
कार्यक्रम में आलोक कुमार, मंटू मंडल, हेमन मांझी, सजनी देवी, रिंकू देवी, मीना देवी, रंजू देवी, सरिता देवी, सावित्री देवी, कंचन देवी, कौशल्या देवी, छोटी देवी, मुन्नी देवी, दुलारी देवी, बाली देवी, रूबी देवी, पूनम देवी और संजू देवी सहित शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं अभिभावक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से सभी अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विद्यालय और अभिभावकों के बीच निरंतर सहयोग एवं संवाद बनाए रखने का आह्वान किया गया।







