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सिमुलतला : रामकुमार वर्मा थे हिन्दी एकांकी के मनोविज्ञानिक आधार दाता

सिमुलतला (गणेश कु. सिंह) :
रामकुमार वर्मा ने पहली बार हिन्दी एकांकी की कथावस्तु को मनोवैज्ञानिक आधार दिया। वे हिन्दी एकांकी के सिरमौर थे। वह जितने बड़े कवि थे उतने ही बड़े साहित्येतिहासकार और एकांकीकार भी थे। पृथ्वीराज की आंखें, हिन्दी साहित्य का समालोचनात्मक इतिहास, आधुनिक हिंदी काव्य, हिन्दी गीतिकाव्य, एकलव्य आदि कालजयी कृतियों ने उन्हें हिन्दी रचना संसार का सिरमौर बना दिया। उक्त बातें महाकवि राम इकबाल सिंह राकेश साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित एकांकी सम्राट रामकुमार वर्मा की जयंती समारोह के अवसर पर परिषद के संयोजक व व्यंग्यकार डा. सुधांशु कुमार ने कही। 

कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में विद्यालय के उपप्राचार्य सुनील कुमार ने कहा कि डॉ. रामकुमार वर्मा हिन्दी एकांकी के सम्राट हैं। कथासम्राट प्रेमचंद की तरह ही उन्होंने हिन्दी एकांकी को  जनचेतना से जोड़ा। विद्यालय की हिंदी शिक्षिका कुमारी नीतु ने रामकुमार वर्मा को  हिन्दी नाटक का कोहिनूर एवं हिन्दी एकांकी का पितामह बतलाते हुए कहा कि उन्होंने ऐतिहासिक नाटकों में भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों का उद्घाटन किया। उनके नाटकों में भारतीय संस्कृति और संस्कार स्पंदित होते हैं। डा. जयंत कुमार ने कहा कि उनकी सृजनात्मक दृष्टि विशाल थी। इसी व्यापक सृजनात्मक दृष्टि के कारण स्वीटजरलैंड के मूर विश्वविद्यालय ने उन्हें डी. लिट् की उपाधि से अलंकृत किया। साथ ही 1967 में उन्हें भारत सरकार द्वारा श्रीलंका में भारतीय भाषा विभाग के रूप में भेजा गया। 1965 ई. में पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।