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गिद्धौर में अधिकारियों की लेट-लतीफ़ी, 12 बजे तक कार्यालय में लटक रहे थे ताले

#पोस्टमॉर्टम/पड़ताल

गिद्धौऱ  (न्यूज़ डेस्क) :-

ग्रामीण इलाकों में जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए सरकार प्रखंड स्तर पर विभागीय पदाधिकारियों को भले ही आवश्यक दिशा निर्देश दे रही हो पर गिद्धौर प्रखंड में पदाधिकारियों के मनमर्जी का आलम ही कुछ और है। प्रखंड मुख्यालय के हर सरकारी बाबू के दरबार पर लटकते ताले ये बताने के लिए पर्याप्त है कि ये अपने ड्यूटी के प्रति कितने समर्पित हैं।



अब सोचने वाली बात यह है कि सरकार के लोकहितकारी व्यवस्थाओं से आमजनों को लाभान्वित करने के लिए विभागीय कार्यशैली से लोग कहाँ तक विकास की कल्पना कर सकते हैं। गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय की बानगी भी कुछ इसी कदर है जहां अधिकारियों की लेट लतीफी आम बात बनती जा रही है।
सोमवार को ग्रामीणों की शिकायत पर मीडियाकर्मी प्रखंड मुख्यालय पहुंचे। समय था 11 बजकर 42 मिनट, प्रखंड मुख्यालय के लगभग हर कार्यालय पर ताले लटक रहे थे। कई विभागों के अधिकारी व कर्मी ड्यूटी से नदारद दिखे। बीडीओ गोपाल कृष्णन का कार्यालय 11:47 तक नहीं खुला।


अब जब घड़ी की सुई 12:00 पर पहुंच चुकी थी इसके बाद भी इंदिरा आवास कार्यालय, बीएएसडब्लूएएन पॉप रूम, प्रखंड नाजिर कन्हैया कुमार, प्रखंड कार्यालय प्रधान दिनकर तिवारी, प्रधानमंत्री आवास पर्यवेक्षक सहित सतप्रतिशत आवास कर्मी नदारद दिखे। अब बज रहा था 12:09 मिनट, किसान भवन में कृषि विभाग के प्रखंड कृषि पदाधिकारी, आत्मा के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक सहित कृषि विभाग के शत प्रतिशत कर्मी की कुर्सियां खाली नजर आयी।


पांच दिनों के लगातार बारिश के बावजूद अपने कार्य से प्रखंड कार्यालय पहुंचे ग्रामीण इन सरकारी बाबुओं को खरी-खोटी सुना रहे थे। इन विभागीय अधिकारियों के कार्यशैली से त्रस्त इन ग्रामीणों की आंखे 12:15 बजे तक सरकारी बाबुओं के आगमन की प्रतीक्षा करते रहे। पर ये सरकारी बाबू हैं कि 10 बजे लेट नहीं और 12 बजे भेंट नहीं के ढर्रे से बाज ही नहीं आते।