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2011 वर्ल्ड कप हीरो के अलविदा कहते ही क्रिकेट के एक महान युग का हो गया अंत

सेंट्रल डेस्क | अक्षय कुमार :
युवराज सिंह... अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जगत का एक ऐसा नाम जिसे चाह कर भी कोई भारतीय भुला नहीं सकता. जी हाँ ये वही युवराज सिंह है जिसने 2003 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ पहली बार अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था. यही वो खिलाड़ी है जिसके बदौलत इंडिया ने अपना पहला टी-20 विश्वकप जीता था.

हालांकि युवी आजकल अच्छे फार्म में नहीं चल रहे थे जिस वजह से 2019 के विश्वकप टीम में उनका चयन नहीं हुआ. लेकिन फिर भी युवराज सिंह करोड़ों भारतीयों के दिलों पर राज करते हैं.

चाहे सामने कोन्नो टीम हो ई त सबको पकड़ के धो डालता था. वो दिन अभी भी याद है जब ऐसा लगता था कि बस सब आउट हो जाए और जल्दी से युवराज आए. ओकर छक्का त् पूछिए मत, बाउंड्री छोटा पड़ जाए... ऐह लम्बा लम्बा छक्का.
अंग्रेजन को बाप बाप करवा दिया था. टी-20 का वह मुकाबला याद कीजिए स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर में 6 छक्का मारकर कर उसका मियाज हरिअर कर दिया था.
अगर ये न होता तो हमारे पास न तो 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप होता और न ही 2011 का वर्ल्ड कप. यही तो अपना युवराज था.

आज जब अचानक सुने कि युवराज सिंह सन्यास ले रहा है मानिए मियाज सुन्न हो गया. युवराज सिंह के सन्यास लेने से भारतीय क्रिकेट का एक युग समाप्त हो गया. वैसे तो इंडिया टीम बेहतर प्रदर्शन कर रही है लेकिन युवी की कमी हमेशा महसूस होगी. विश्वास ही नहीं हो रहा है युवराज को अब विदेशीया के खिलाफ मारते नहीं देख पाएंगे.