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चकाई : रेफरल अस्पताल हुआ कुव्यवस्था का शिकार, पेयजल के लिए तरस रहे मरीज व कर्मी

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[ चकाई | श्याम सिंह तोमर ]  Edited by Abhishek:- 

एक और जहां मौजूदा सरकार हर घर शुद्ध पेयजल पहुंचाने में अपनी उपलब्धियों को सर्वोपरि बता कर पीठ थपथपा रही है, वहीं दूसरी ओर चकाई प्रखंड के घनी आबादी को स्वस्थ रखने वाले एकमात्र सरकारी अस्पताल पानी की आस में बदहाली के चरम पर पहुंच गया है।


 इस भीषण गर्मी में यहां मरीजों के लिए व्यवस्था एकदम नदारद है। सुविधाओं को लेकर वाह-वाही बटोरने वाले इस अपस्पताल की वास्तविकता इसके विपरीत है।

कुछ ऐसा है अस्पताल का आलम

सामान्य सुविधा की यदि बात करें तो इस गर्मी में सबसे पहले पेयजल को प्राथमिकता दी जाती है। पर इस अस्पताल का आलम है कि यहाँ के कर्मियों एवं मरीजों को शुद्ध पेयजल के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। रेफरल अस्पताल चकाई में महीनों से पानी की समस्या रहने के बावजूद भी अस्पताल प्रशासन गहरी नींद में सोयी हुई नजर आ रही है। नाम ना छापने के शर्त पर अस्पताल कर्मचारी बताते हैं कि स्थानीय पदाधिकारी तानाशाही रवैया अपनाए हुए हैं। काम के बदले आराम कर सेवा लाभ ले रहे हैं। कोई भी परेशानी होने पर उसपर सार्थक कदम नहीं उठाया जाता है। कुछ कहने पर वेतन पर  रोक लगा दी जाने की धमकी भी दी जाती है। इसी चक्कर में कई कर्मचारियों का वेतन बहुत दिनों से रुका हुआ है।




महंगे बोतलबंद पानी से बुझती है मरीजों प्यास

तफ्तीश के दौरान अस्पताल में मौजूद ज्यादातर नल और वाटर प्यूरीफायर आउट ऑफ सर्विस पाए गए। बताया जाता है कि वॉटर प्यूरीफायर करीब एक साल से खराब है। चापाकल पानी के जगह हवा उगल रहा है। लेकिन अस्पताल पदाधिकारी उसे भी ठीक बताने से बाज नहीं आए। मरीजों को अपनी प्यास बुझाने के लिए आसपास के होटलों, मंदिर या फिर महंगी बिसलेरी के बोतलों का सहारा लेना पड़ रहा है।


23 पंचायतों के मरीजों के स्वास्थ्य की नहीं है फ़िक्र


इस अस्पताल में चकाई प्रखंड के 23 पंचायतों से तकरीबन सैंकड़ों पेसेंट रोजाना आते हैं, बावजूद इस अस्पताल की अव्यवस्था सर चढ़ कर बोल रही है। ताज्जुब की बात तो यह है कि भीषण गर्मी के बावजूद अस्पताल प्रबंधक द्वारा पेयजल व्यवस्था के लिए प्रयास तक नहीं की जा रही है। सामान्य मरीज तो दूर, यहां प्रसूताओं के लिए भी पानी की समुचित व्यवस्था नही है।



gidhaur.com के कैमरे में कैद हुई अस्पताल की कुव्यवस्था:-

जब gidhaur.com के कैमरे में अस्पताल की कुव्यवस्था कैद हुई तो अस्पताल प्रबंधक ने तुरंत पेयजल व्यवस्था दुरुस्त होने की बात कहकर औपचारिकता को विधिवत पूरा किया।मगर सुस्त पदाधिकारियों द्वारा कबतक पेयजल व्यवस्था  की जाती है यह तो कुछ समय के बाद ही पता चल पाएगा। हॉस्पिटल में कार्यरत आशा कर्मी भी अस्पताल की व्यवस्था पर चिंता जाहिर करते हुए बताती हैं कि पानी की समुचित व्यवस्था करने में अस्पताल प्रबंधक द्वारा कोताही बरती जा रही है। आशा द्वारा बाल्टी भरकर पानी लाने के बाद प्रसूता की साफ सफाई की जाती है। मरीजों के साथ साथ यहां कार्यरत कर्मी भी अस्पताल के इस कुव्यवस्था का दंश झेल रहे हैं।


परिजनों का क्या है कहना

मरीजों के परिजनों की यदि मानें तो, बीते कुछ दिनों में गर्मी के तेवर बड़े तल्ख हो गए हैं। पारा भी तेज चढ़ा है। बावजूद इसके अस्पताल में पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। एक चापाकल काम तो करता है लेकिन उससे निकलने वाला पानी पीने योग्य ही नहीं है। मरीज को छोड़कर बाहर से पानी लाना परिजनों के लिए काफी चुनौतियों भरा साबित हो रहा है। परिजन कहते हैं कि पानी लाने के लिए बाहर जाते वक्त भी इन्हें अपने मरीज की स्थिति बिगड़ जाने का डर सताता है। वहीं कुछ परिजन कहते हैं कि अस्पताल के इस लचर व्यवस्था न तो कोई प्रतिनिधि ध्यान दे रही है और न ही विभाग।



बोले - प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी

इस बाबत चकाई प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश कुमार ने कहते हैं कि खराब चापाकल बनवाने हेतु मिस्त्री को सूचना दे दी गई है।मरीजों के शुद्ध पेयजल हेतु जार वाला पानी लगवाया गया है। वाटर सप्लाई बंद रहने से वाटर प्यूरीफायर आउट ऑफ सर्विस है।


कहते हैं स्वास्थ्य प्रबंधक महोदय

इस संदर्भ में जब चकाई स्वास्थ्य प्रबन्धक डॉ रमेश पांडेय से बात की गई तो उन्होंने बताया कि पानी की समस्या दो दिन से उत्पन्न हो रही है। अस्पताल प्रबंधन पूरी जिम्मेदारी के साथ मरीजों की देखभाल के लिए तत्पर है।