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जमुई में यदि हो जाए सूरत जैसी घटना तो कौन लेगा जिम्मेदारी ?


[न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा] :-

गुजरात के सूरत शहर स्थित तक्षशिला काम्प्लेक्स में हुए अग्निकांड ने पूरे देश को दहला दिया।  उक्त कॉम्प्लेक्स में आगजनी से प्रभावित एक कोचिंग सेंटर को लेकर जमुई जिले के भी कोचिंग संस्थानों के सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।



 ऐसे सवालों के जवाब की नब्ज टटोलने की कोशिश में gidhaur.com टीम को कई ऐसे कारण और बिंदु मिले जिससे जमुई कोचिंग उद्योग के रूप में उभरने का कारण पता चलता हो। ऐसे में कोचिंग संस्थानों के बायलॉज पर भी सवाल उठना लाजमी है।
जमुई जिले भर में कुकुरमुत्ते की तरह उग रहे कोचिंग का कारोबार अपने उफान पर है। गांव से जमुई में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राएँ जमुई को कोचिंग का मक्का समझते हैं। परिणामतः जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हर साल हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं कोचिंग के लिए जमुई का आसरा पाते हैं।


जमुई जिले के कई +2 विद्यालयों में कक्षाओं के संचालन न होने से बारहवीं में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भी कोचिंग एक अचूक हथियार के तौर पर सामने आ रही है, जहाँ बच्चे खुद को बेस्ट बनाने के लिए आते हैं। इस बात में भी कोई दो राय नहीं कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययन कार्य की अनियमितता से जमुई जिले में कोचिंग के विस्तार को बल मिला है।


◆ [1528 गांवों का कनेक्टिव पॉइंट है जमुई]

जिला मुख्यालय में पांव रखते ही जमुई के चिन्हित इमारतों पर टंगी कोचिंग की बड़ी-बड़ी होर्डिंग भी इस बात की पुष्टि कर देती हैं कि जमुई शहर भी कोचिंग के एक बड़े हब के रूप में उभर रहा है। बुद्धिजीवियों का मनना है कि तकरीबन डेढ़ हजार गांवों का जमुई जिलों की कनेक्टिविटी यहां कोचिंग सेंटर के पनपने का एक बड़ा कारण है। इसका फायदा मैट्रिक, इंटर के साथ साथ प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने आने वाले स्टुडेंट्स को सहज ही मिल जाता है।


[प्रतिस्पर्धा से बढ़ी कोचिंगों की संख्या]


कोचिंग सेंटरों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से यहां पढ़ाई के तौर-तरीकों में भी टेक्नोलॉजी से जुड़े कई तरह के प्रयोग नजर आने लगे हैं। हालांकि कॉम्पिटिशन क्लास में दाखिला लेने वाले हर छात्र-छत्राएँ सफल तो नही होते पर पुनः प्रयास और सरकारी नौकरी के ख्वाब को पूरा करने के लिए कुछ वर्षों से जमुई में आने वाले कोचिंग स्टुडेंट्स की संख्या में इजाफा हो रहा है।


◆ [बच्चों के लिए विकल्प बन रहा कोचिंग]


पहले जब जमुई में बेहतरीन कोचिंग की व्यवस्था नही तब यहां के स्टुडेंट्स जिले से बाहर की कोचिंग का सहारा लेते थे। पर अब विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं  के लिए भी जमुई में कोचिंग की संख्या में इजाफा हुआ है। सरकारी नौकरी की होड़ के वजह से भी जमुई में कोचिंग एक मजबूत विकल्प के तौर पर उभर रही है।जमुई जिले भर में कई ऐसे कोचिंग संस्थान भी है जो अपने निजी स्वार्थ और आकूट कमाई के लिए अभिभावकों के आर्थिक स्थिति को दरकिनार कर देते हैं।

◆ [एक भी कोचिंग नहीं है निबंधित, विभाग उदासीन]

यहाँ यह बता दें कि ,मुंगेर विभाजन के बाद 21 फरबरी 1991 को आधिकारिक तौर पर जमुई को जिले के रूप में घोषित किया गया था। ताज्जुब यह है कि सिल्वर जुबली बीत जाने के बाद भी जमुई जिले में एक भी ऐसा कोचिंग संस्थान नहीं है जो पूर्णतः अधिकृत और पंजीकृत हो। शिक्षा विभाग के उदासीनता के कारण ही 2 दशकों बाद भी जमुई जिले के एक भी कोचिंग का पंजीकरण नहीं हो सका है। विभागीय अधिकारी भी इस संदर्भ में कोई भी सार्थक कदम उठा पाने में असमर्थ दिख रही है।

◆ [एक नजर मुख्य बायलॉज पर]

1].  कोचिंग में बैठने के लिए पर्याप्त जगह
2].  अनुभवी व योग्य शिक्षकों का विषयवार होना
3].  फर्स्ट एड बॉक्स , फायर एक्सटिंगशेर
4].  शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई
5].  आपातकालीन निकास व पार्किंग स्थल

◆ [अधिनियम का क्या है प्रावधान]

सम्पूर्ण बिहार में कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवम विनियनम) अधिनियम वर्ष 2010 में ही लागू हुआ था। उस क्रम में कई प्रावधान भी रखे गए थे। जिनमें ये भी शामिल हैं -

1].  बिना निबंधन कोई भी कोचिंग संचालित न हो
2].  तीन सालों के निबंधन बाद करना होगा रिन्यू
3].  कम से कम ग्रेजुएशन हो शिक्षक की योग्यता
4].  फीस के साथ प्रॉस्पेक्टस भी जरूरी
5].  विभागीय मानकों को पूरा करने में हो सक्षम

◆ [क्या कहती है सामाजिक संस्था] :-

राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा , स्वास्थ्य व सोशल एक्टिविटीज में सक्रिय रहने वाले सामाजिक संस्था मिलेनियम स्टार फाउंडेशन के अध्यक्ष सुशान्त साईं सुन्दरम की राय है कि तंग गलियों और अपर्याप्त संसाधनों में बच्चों को बेहतर भविष्य के सपने दिखने वाले कोचिंग संसथान, आपदिक दृष्टिकोण से कितने हद तक सुरक्षित हैं, प्रशासनिक स्तर पर इस ओर गंभीरतापूर्वक ध्यान दिया जाना चाहिए।

◆ [ताख पर रखे जाते हैं विभागीय मापदंड, नहीं होता पालन]

ऐसा नहीं है कि जमुई जिले में चल रहे सभी कोचिंग इंस्टीट्यूट हर दृष्टिकोण से मुकम्मल हैं, क्योंकि जिस अनुपात में कोचिंग की तादाद बढ़ी है, उस स्तर तक यहां सुविधाओं का विस्तार नहीं है। हालांकि, पिछले पांच सालों में जमुई की अर्थव्यवस्था में बड़ी पूंजी के आने से कई मायने में यहां की प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, लेकिन कई खामियां भी साथ आई हैं। लिहाज़ा, विभाग द्वारा तय किये गए मानकों के पालन की स्थिति जिले में संतोषजनक नहीं है।

◆  [विभागीय अधिकारी की भी सुनिए] :-

इस संदर्भ में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) विजय कुमार हिमांशु ने कहा कि बायलॉज को पूरा नहीं करने वाले कोचिंग संस्थानों को बंद कराया जाएगा। जमुई जिले में चल रहे कोचिंग संस्थानों के निबंधन को लेकर विभाग समुचित कदम उठाएगी।