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मातृ दिवस पर विशेष : वही गोद, वही माँ मिले

मांगोबंदर | शुभम मिश्र】:-

"मांग लूं ये मन्नत,कि फिर से ये जहां मिले,
फिर वही गोद मिले,फिर वही माँ मिले ।"

माँ  ! यह सिर्फ शब्द नहीं है, बल्कि संपूर्ण ग्रंथ है।जिसमें प्रेम,त्याग,समर्पण,मार्गदर्शन जैसे न जाने कितने अध्याय मौजूद होते हैं।माँ यानि हमारी जिंदगी का आधार,हमारी सबसे बड़ी ताकत।मुश्किल चाहे छोटी हो या बड़ी सबसे पहले माँ का नाम ही जुबान पर आता है। यकीन होता है कि मां है न....सब संभाल लेगी।उसका त्याग,समर्पण और मार्गदर्शन हर बाधा को दूर कर देगा। कच्ची मिट्टी सरीखें बच्चों को कामयाब बनने की सीख देने के साथ मां कामयाब भी बनाती है। माँ भले पढ़ी हो,या न हो परंतु संसार का महत्व एवं अनुभव भरा ज्ञान हमें माँ से ही मिलता है। परेशानी में जब हम होते हैं तो तुरंत पहचान लेती है।हमारी खामोशी को भी वह पढ़ लेती है। यह कला सिर्फ माँ में ही होती है। माँ का हौसला गज़ब का होता है।हार न मानने की ज़िद और विपरीत परिस्थितियों में " एकलव्य " की तरह हौसले से पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन जैसी खूबियाँ सिर्फ माँ में ही होती है। वह बच्चों का दर्द अपने आंचल में समेटे कितना दुःख तकलीफ को सहन कर उनको आगे बढ़ाती है।

बता दें कि बच्चों के लिए पूरा जीवन समर्पित कर देने वाली माँ के लिए प्रत्येक बर्ष मई माह के दूसरे रविवार को मातृ दिवस या मदर्स डे मनाया जाता है। एक दिन माँ के नाम करने की अपील 1908 ई॰ में अमेरिकी सामाजिक कार्यकर्ता एना जार्विस ने की थी। बाद में 9 मई 1914 ई॰ को अमेरिका में इसके लिए कानून बना और धीरे-धीरे संसार ने इसे अपना लिया। अतः इस वर्ष 12 मई 2019 को हमलोग मदर्स डे मना रहे हैं ।