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जमुई : फल-फूल रहा है नकली आभूषणों का गोरखधंधा, प्रशासन बेखबर




न्यूज़ डेस्क | gidhaur.com टीम:-

अगर आप इस साल विवाह लग्न के मौके पर सोने या चांदी के आभूषण खरीदने जा रहे हैं ;तो आप सावधान हो जायें। क्योंकि ज्वेलर्स आपको भी धोखा दे सकते हैं। सूत्रों की मानें तो जमुई जिले के झाझा, सिकंदरा, खैरा, अलीगंज यहां तक की गिद्धौऱ बाजार में भी इन दिनों सोने-चांदी के नकली आभूषणों की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है जिसका शिकार मुख्यतौर पर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के लोग हो रहे हैं, खासकर महिलाएं। इन सबका पता ग्राहकों को तब लगता है जब वो पुराने आभूषण को बेचने जाते हैं, तो दूसरे ज्वेलर्स द्वारा वजन में कम एवं नकली बताया जाता है। ये माजरा सिर्फ जमुई जिले के विभिन्न स्थानों में प्रशासनिक अनदेखी के कारण फलीभूत हो रहा है। सीधे-साधे लोग इसके शिकार हो रहे हैं। ये स्थिति शहरी क्षेत्रों में ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बहुतायत देखने को मिल रही है। अलीगंज की बात करें तो यहां दर्जनों ऐसे मौसमी दुकानें हैं जो लग्न के समय लगाये जाते हैं एवं ठगी करने के पश्चात चंपत हो जाते हैं। बावजूद इसके प्रशासन बेखबर है। सूत्र बताते हैं कि जमुई जिले भर में कई ज्वेलर्स दुकान बिना जांच प्रक्रिया पूरी किये ही सोने के आभूषण में हाॅलमार्क लगाकर बिक्री कर रहे हैं। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि हाॅलमार्क असली है या नहीं। बता दें कि नकली सोने में के.डी.एम एवं तांबे की मिलावट होती है। वहीं इन दिनों जर्मन सिल्वर को चांदी का आभूषण बताकर बेचने का खेल जमुई के अलावे गिद्धौऱ जैसे जगहों पर भी खुले आम चल रहा है। लग्न के मौके पर चांदी की पायल, चाबी, मछली, रिंग, बिछिया, पान पत्ता, कीया चेन आदि की मांग सबसे अधिक होती है। ज्वेलर्स इसमें जमकर मुनाफा कमा रहे हैं।

[ज्वैलरी खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान]

◆ हमेशा हाॅलमार्क युक्त आभूषण लें।
◆ हाॅलमार्क में त्रिकोण के आकार का बी.आर.एस का चिह्न देख कर लें ।
◆ हमेशा विश्वस्त दूकानदार से आभूषण लें।
◆ पक्की बिल लें जिसमें हाॅलमार्क का भी शुल्क दर्शाया हो ।
◆ चांदी के आभूषण के शुद्धता का स्टांप लें।
◆ चांदी के आभूषण को मैग्नेट-टेस्ट,थर्मलकंनेक्टिविटि जैसे उचित व आवश्यक टेस्ट कर लें।

[क्या है कानूनी कार्रवाई] :-
    
विशेषज्ञों की मानें तो किसी भी तरह की शिकायत को ग्राहक भारतीय मानक ब्यूरो की वेबसाईट या सीधे जिले में संबंधित विभाग के कार्यालय में दर्ज करा सकते हैं। जिसके पश्चात भारतीय मानक ब्यूरो अधिनियम 1986 को संशोधित कर 2016 के एक्ट के मुताबिक आभूषण की लागत का 10 गुणा जुर्माना जो न्युनतम एक लाख रुपये है या एक साल की सजा का प्रावधान है या दोनों हो सकता है ।

[ प्रशासनिक सजगता से थम सकता है यह गोरखधंधा ]

बता दें कि जर्मन सिल्वर व्हाइट मेटल होता है जो संभवतः बाजार में 80 से 100 रूपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध होता है। इसका इस्तेमाल मुख्यतः आर्टिफिशियल ज्वैलरी निर्माण में होता है। जर्मन सिल्वर की 50 रूपये तक की ज्वैलरी को चांदी बताकर 400 से 500 तक में बड़ी आसानी से बेचा जा रहा है। इस गोरखधंधे पर लगाम लगाने के लिए प्रशासनिक सजगता की दरकार है।
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इनपुट - [शुभम मिश्र / चंद्रशेखर सिंह]