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गिद्धौर : गन्ने की खेती से विमुख हुए किसान, उपज ने छीनी जीवन की मिठास

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न्यूज़ डेस्क | अभिषेक कुमार झा】:-

कभी गन्ने की फसल से पटा रहने वाला गिद्धौऱ का इलाका आज इसकी मिठास को तरस रहा है। बात उन दशकों की है जब स्थानीय किसान बड़े ही चाव से गन्ने की खेती कर गिद्धौऱ और अपने जीवन मे मिठास घोलते थे, पर वर्तमान समय मे  गिद्धौऱ के किसानों का गन्ने की फसल से अब मोह भंग हो रहा है। जिससे धीेर-धीरे गन्ने के खेत कम होते जा रहे हैं। फलस्वरूप गन्ना उत्पादक काश्तकारों को गन्ने की फसल से लगातार हो रहे नुकसान के चलते अब स्थानीय किसान गन्ने से दूरी बनाने लगे हैं।
           हलांकि, जमुई जिले में गन्ना विकास का क्षेत्रीय कार्यालय भी है। इसको लेकर नाबार्ड ने भी भिविन्न योजनाओं को धरातल पर उतारा, पर ये योजना किसानों तक पहुंचने से पहले कागजों पर ही सिमट गई।


गिद्धौऱ प्रखंड क्षेत्र के बुजुर्गों व बुद्धिजीवियों की यदि मानें तो उनका कहना है कि तकरीबन एक दशक पूर्व गिद्धौर प्रखंड सहित जमुई जिले भर में गन्ने की खेती व्यापक पैमाने पर होती थी। अब आंशिक तौर पर गिद्धौर के गिने चुने गांवों में ही गन्ने की खेती उपेक्षित रूप से की जा रही है। आधुनिकता का आलम यह है कि कोलसार से कोल्हू में चलने वाले बैल के गले की घंटी मौन पड़ने लगी है।
नगदी फसल कहे जाने वाले गन्ने की खेती में निकाई-गुड़ाई के लिए गिद्धौर के किसानों को यदि विभाग द्वारा बेहतर तकनीक वाले यंत्र की व्यवस्था सरकारी स्तर पर कर दी जाय तो गन्ने की खेती से विमुख हो चुके किसानों के जीवन मे  मिठास पुनर्स्थापित हो सकेगी।