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लोकसभा चुनाव : कायस्थ क्षत्रपों का रण क्षेत्र बना पटना साहिब

पटना/सेंट्रल डेस्क [अनूप नारायण] :
पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र से एनडीए गठबंधन के तहत भाजपा ने केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया है वहीं दूसरी तरफ निवर्तमान सांसद शत्रुघ्न सिन्हा इस बार कांग्रेस के पाले में चले गए हैं और कांग्रेस ने उन्हें अपना पटना साहिब से उम्मीदवार बनाया है. कायस्थ बहुल्य पटना साहिब लोकसभा क्षेत्र में इस बार मोदी मैजिक के आगे शत्रु के सितारे गर्दिश में दिख रहे हैं. अभिनेता और राजनेता शत्रुध्न सिन्हा के बीजेपी का दामन छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला कितना सही साबित होता है यह तो चुनाव के बाद ही पता चल पाएगा.

पटना की सियासी रणभूमि में रविशंकर प्रसाद को अपने ही पुराने साथी शत्रुघ्न सिन्हा से कड़ा मुकाबला करना होगा. बता दें कि दो बार से पटना साहिब सीट से सांसद रहे शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी में रहते हुए पीएम नरेंद्र मोदी और पार्टी नीतियों पर लगातार हमलावर रहे. इसी बगावती तेवर के चलते बीजेपी ने उनका टिकट काटकर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को अपना प्रत्याशी बना दिया. हालांकि बीजेपी की ओर से आरके सिन्हा भी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने उन पर भरोसा नहीं जताया.

जातीय समीकरण
पटना साहिब लोकसभा सीट पर जातीय समीकरण के आधार पर कायस्थों का दबदबा है. यहां कायस्थों के बाद यादव और राजपूत वोटरों का बोलबाला है. पिछले दो लोकसभा चुनावों से पटना साहिब सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार नंबर दो रहे हैं. ऐसे में महागठबंधन के तहत ये सीट कांग्रेस के खाते में गई है और इस सीट से शत्रुघ्न सिन्हा कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.
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दिलचस्प बात ये है कि पटना साहिब सीट पर कायस्थ मतदाताओं का झुकाव बीजेपी के पक्ष में रहता है, ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस के टिकट पर उतरने से यहां मुकाबला दिलचस्प हो सकता है. कांग्रेस के टिकट से चुनाव मैदान में आने से शत्रुघ्न को महागठबंधन के तहत यादव, मुस्लिम, दलित मतों का समर्थन मिल सकता है. इसके अलावा कायस्थ के वोटों में भी शत्रुघ्न सेंधमारी कर सकते हैं.

वहीं, रविशंकर प्रसाद पहली बार चुनावी मैदान में उतर रहे हैं. ऐसे में कायस्थों के मतों को साधने के साथ-साथ बीजेपी के परंपरागत वोटों को भी साधने की बड़ी चुनौती उनके सामने है. जिस तरह से आरके सिन्हा के समर्थक लगातार उनकी मुखालफत कर रहे हैं. ऐसे में उन्हें भितरघात से भी निपटना पड़ सकता है.

पटना का सियासी समीकरण
पटना साहिब लोकसभा सीट शुरू से कांग्रेस, सीपीआई और बीजेपी का गढ़ रहा है. सारंगधर सिन्हा यहां के पहले सांसद थे. रामदुलारी सिन्हा ने 1962 में कांग्रेस की ओर से यहां का प्रतिनिधित्व किया था. वहीं सीपीआई
की टिकट पर राम अवतार शास्त्री यहां से तीन बार सांसद चुने गए. 1977 में इंदिरा विरोधी लहर में लोकदल के महामाया प्रसाद सिन्हा लोकसभा में पहुंचे.
सीपी ठाकुर एक बार कांग्रेस और दो बार बीजेपी से लोकसभा पहुंच चुके हैं. 1989 में बीजेपी से शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव भी यहां से चुनाव जीत चुके हैं. रामकृपाल यादव भी यहां से तीन बार आरजेडी के टिकट पर सांसद चुने जा चुके हैं. 2009 में परिसीमन के बाद पटना जिला की दो सीटें बनी. इसमें एक पाटलिपुत्र और दूसरी पटना साहिब सीट. पटना साहिब सीट से शत्रुघ्न सिन्हा लगातार दो बार चुनावी जंग फतह कर चुके हैं, लेकिन इस बार लड़ाई बदल गई है और शत्रुघ्न सिन्हा और रविशंकर के बीच टक्कर होगी.