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बांका : प्रखंड कार्यालय में पियक्कड़ों व नशेड़ियों की लगती है जमघट, कानून तमाशबीन


{धोरैया(बांका)| अरुण कुमार गुप्ता}:-

बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए 2 वर्ष 8 माह बीत गये। पूर्ण शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर बड़े-बड़े दावे भी किए जा रहे हैं। राज्य के आलाधिकारियों के द्वारा शराबबंदी कानून की सफलता को लेकर खूब सारे आंकड़े भी पेश किए जा रहे हैं। इसके रोकथाम के लिए सरकार द्वारा रोज नित्य नये निर्देष दिये जाते है।

वहीं इसके इतर प्रखंड कार्यालय परिसर मैदान में बने स्टेज पर प्रत्येक दिन शाम ढलते ही शराबियों की जमघट लग जाती है । शराब और गांजा के शौकीन इस जगह को सुरक्षित मानकर यहां जमघट लगाते हैं। कभी-कभी यहां पार्टी का दौर भी चलता है जो देर रात तक चलती है। शराबियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वह शराब का सेवन करने के बाद खाली बोतल को फेकना भी मुनासिब नहीं समझते हैं। स्टेज पर ही बोतल को खड़ा कर सजा के रख देते हैं। परिसर में शराबियों का यह दौर चलने से मैदान भी गंदगी से पटा रहता है। जिससे सुबह-सुबह मॉर्निंग वॉक करने आए लोगों को भी जिल्लत का सामना करना पड़ता है।
 सूत्रों की मानें तो स्थानीय पुलिस धोरैया बाजार के मुख्य मार्ग पर ही गस्ती करते रह जाती है जिसका फायदा पियक्कड़ खूब उठाते हैं। जबकि कुछ महीनों पूर्व तत्कालीन बीडियो गुरुदेव प्रसाद गुप्ता एवं वर्तमान बीडीओ अभिनव भारती के सरकारी आवास में घुसकर शराब के नशे में धुत होकर युवक द्वारा गाली-गलौज एवं दुर्व्यवहार की घटना को अंजाम दिया जा चुका है । इस मामले को लेकर दोनों ही बीडिओ द्वारा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वहीं गाली ग्लौज करने वाले दोनों शराबी जेल की हवा भी खा चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन कुंभकर्णी निद्रा में सोया हुआ है।
पर यहां बड़ा सवाल यह है कि कि जब बीडीओ और सीओ आवास के पीछे स्थित मैदान का यह हाल है तो सुदूर गांवों में शराबबंदी अभियान कितना कारगर है इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। सवाल यह भी है कि आखिर प्रखंड मुख्यालय में शराब की आपूर्ति कहां से हो रही है। प्रखंड मैदान में टहलने आए बुद्धिजीवी भी ऐसे वारदातों से ससंकीत है।
कहां से लाई जाती है इतनी बड़ी मात्रा में शराब?
पुलिस की मुस्तैदी के बावजूद बिहार में धड़ल्ले से शराब का कारोबार चल रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार में इतने बड़े पैमाने पर शराब कहां से लाया जाता है और उसके संरक्षण में किन-किन लोगों को हाथ रहता है।
लोगों का मानना है कि राज्य सरकार चाहे जितना भी दावा कर ले, लेकिन बिहार के गांव-देहात में कुछ और ही नजारा देखने को मिल रहा हैै कि किस तरह से बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है।