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खेत खतिहर चिन्तन शिविर आयोजित, किसानों ने सुनाए मूलभूत समस्याएं


[धोरैया, बांका /अरुण कुमार गुप्ता]
बांका जिला के धोरैया प्रखंड के गौरा गाव में अंग किसान मोर्चा के तत्वावधान में खेत खेतिहर  चिंतन शिविर का आयोजन संयोजक कौशल कुमार सिंह की अध्यक्षता में आहूत की गई। बैठक में धोरैया प्रखंड के लगभग सभी पंचायतों के प्रतिनिधियों एवं सैकड़ों की संख्या में किसानों ने भाग लिया एवं अंग किसान मोर्चा को प्रदेश से लेकर देशव्यापी आंदोलन की ओर  बढ़ाने का संकल्प लिया गया। बैठक में उपस्थित सभी किसानों ने संकल्प लिया कि किसानों की स्वयं की एक जात होती है एवं इसके बिखराब का फायदा राजनीतिक दल चुनाव  के वक्त उठाते रही है। सभी किसानों की मूलभूत समस्या सिंचाई ,उन्नत बीज ,बाजार मूल्य अन्य सभी में एकरूपता रहते हुए भी यह बातें कोई भी सरकार द्वारा इस पर ध्यान नहीं देती है। बैठक में उपस्थित पूर्व मुखिया परवेज आलम ने कहा कि नदियों के अत्यधिक दोहन से जलस्तर प्रभावित हुआ है और रही सही कसर काडा विभाग द्वारा सभी जिम्मेदारी बांध के स्वरूप को ही बदल दिया गया है। विभागीय भ्रष्टाचार के कारण सभी इसके शिकार हो चुके हैं । वही जिला पार्षद रफीक आलम ने कहा कि गेरूआ नदी सहीत अन्य नदियों से अत्यधिक बालू उठाव होने के कारण भू-जल स्तर घट जाने के कारण किसानों के बोरिंग भी फैल हो रहे है। ब्रिटीश काल चानन नदी से हर खेत को जोड़ा गया था लेकिन आज पंपारिक सिचांई व्यवस्था बिलकुल खतम हो गई है। वहीं किसान उमाशंकर मिश्र, अधिकलाल सिंह, इन्द्रदेव मंडल, लक्ष्मी सिंह सहित अन्य किसानों ने कहा कि पानी के बीना किसान भुखे मर रहे है। अगर गेरूआ नदी में  चैक डैम का निर्माण किया जाय तो एक बार फिर हमलोगांे के खेतों में स्वतः पानी पुहंचने लगेगी। वहीं वर्षों से खराब पड़े ट्यबेल को ठीक कराने की बात कही।जिससे किसानों के  बीच सिंचाई की समस्या उत्पन्न नही हो। जबकि किसान मनोज मिश्र ने कहा कि कर्ज माफी के नाम पर सरकार हम किसानों को भीखमंगा बना रही है। इसका मुख्य कारण किसान आपस में संगठित नही हैे।
अपने संबोधन में अंग किसान मोर्चा के संयोजक कौशल कुमार सिंह ने कहा कि इस संस्था संगठन से जुड़ने वाले किसानों की कोई बाध्यता नहीं होगी परंतु उनकी सोच किसानों के प्रति ईमानदार होनी चाहिए। हमलोग संगठन के माध्यम से अपनी समस्याएं सरकार के समक्ष रखेंगे जिसे मानना सरकार की बाध्यता होगी अंग किसान मोर्चा सदा किसानों के हित में खड़ा रहेगी। आने वाले समय में गेरूआ सहीत अन्य नदीयांे में जगह-जगह सिंचाई हेतु चेक डेम बनवाने के लिए हम संघर्ष करेंगे।
उन्हौने कहा कि वर्ष  1970 में गेंहू 76 रूप्या क्ंिवटल थी लेकिन 47 वर्ष बाद इसका मुल्य मात्र 1450रू0 है। यानी कि 47 वर्षों में किसान के उपजाये गेहूं की कीमत मात्र 19 गुणा बढ़ी। जबकि सरकारी मुलाजीम के बेसीक पे और डीए मीलाकर 120 से 150 गुणा बढ़ाई गई, वहीं स्कूल के शिक्षक को 280 से 320 गुणा,काॅलेज ,यूनिवसर््ीटी का 150 से 170 गुणा इन 47 वर्षो में बढ़ाई गई, लेकिन किसान के उपजे समानो में मात्र 19 गुणा वृद्धि की गई। अगर इस दौरान किसानों को भी इतनी गुणी वृद्धि की गई होती तो सरकारी कर्मी अपना नौकरी छोड़ चुके होते। अगर इन 47 वर्षों में सरकार किसानों के अनाज में भी सरकारी नोकरी की तरह वृद्धि करती तो आज किसान खुशहाल रहते और गेहूँ की कीमत बाजार में 7700 रूप्ये होती। सरकार सातवें वेतन आयेाग लाकर सरकारी खजाने पर 4 लाख 80 हजार लाख करोड़ का अतिरिक्त भार दे रही है। अगर सरकार किसानों को 2 लाख करोड़ रूप्या एक साल में दे देती है तो किसानों के बीच हहाकार मच जाएगी। सातवें वेतन पर सरकार का पैसा व्यर्थ जा रहा है। लेकिन सरकार की बनाई पाॅलीसी जो वर्षों से चली आ रही है कि गरीब को गरीब ही रहने दो, जिसमें सभी सरकार संलिप्त है।

मौके पे मुखिया रजनीश कुमार ,मो० इकबाल, सरपंच भरोसी मंडल, श्रीकांत रजक, पूर्व मुखिया शिवनारायण सिंह, उमेश चन्द्र रजक, पूर्व जिला पार्षद अब्दूल जब्बार,  राजीव साह, गारीश पासवान, गुलफराल आलम, नवल सिंह, भारती जी, कमल साह, सुन्ंदर मंडल, अनिल साह, श्रीराम मिश्र, जयराम मिश्र, मदन रजक, प्रदीप सिंह, राजीव सिंह, रामकृष्ण साह,पंचानेद पासवान, किशन रविदास,मो० कासीम सहित अन्य किसान मौजूद थे। 

प्रखंड स्तरीय क्रयवाहक संचालन समिति ।
गिरीश पासवान- चलना, सुनील चैधरी- रणगांव, पांचू मंसूरी- कुर्मा, मो० कासीम- जयपुर, नवल सिंह- ताहिरपूर गौरा, शिवनारायण सिंह एवं इन्द्रदेव मंडल- बटसार,  मो० जहांगीर एंव मो० शरीफ - बीरबलपुर, मो० जुबैद आलम - भेलाय, गेापाल प्रसाद सिंह- घसिया, मो० मुस्लीम एवं राजीव रंजन-  करहरिया, विकास कुमार मंडल- अहिरो, मो० करीम महिला विशनपुर, मो० मजहर आलम- बलियास, मो० नवुल- मकैता बबुरा
अगामी निर्धारित कार्यक्रम
26 दिसम्बर - रजौन,27 दिसम्बर- बाराहाट, 28 दिसम्बर- कटोरिया, 29 दिसम्बर- बांका , 3 जनवरी - अमरपुर, 4 जनवरी- शंभूगंज, 5 जनवरी - फुल्लीडुमार, 6 जनवरी - चानन,     7 जनवरी- बेलहर, 8 जनवरी - बोंसी