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खुशखबरी! बादलडीह पुल निर्माण से 2 राज्यों एवं 3 जिलों को मिली आवागमन की सुविधा

{gidhaur.com |भीम राज/नीरज कुमार} :-

जमुई जिले के खैरा प्रखंड अंतर्गत क्यूल नदी के बादलडीह घाट पर पुल निर्माण का कार्य पूरा हो जाने से दो राज्यों एवं तीन जिले के लोगों को आवागमन की सुविधा होगी। इस पुल के निर्माण से जमुई जिले के खैरा प्रखंड तथा नवादा जिले के कौवाकोल प्रखंड के सैकड़ों गांव के लोगों के साथ -साथ झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले के तीसरी चंदौली प्रखंड के दर्जनों गांव के लोग ही इस पुल निर्माण से लाभान्वित होंग।  इन लोगों का आवागमन सुलभ होगा विशेषकर जमुई जिले के लोगों को 50 से 60 किलोमीटर की कम दूरी तय करके झारखंड के गिरीडीह जिला पहुंच सकेंगे ।


इसके अलावा जमुई जिलेवासी को नवादा, राजगीर आदि शहरों की दूरी भी 40 से 50 किलोमीटर कम हो जाएगा।  इस पुल निर्माण के हो जाने से दोनों राज्यों को सुविधाओं तो मिलेगी ही साथ ही साथ खैरा प्रखंड के चनरवर,  रोपाबेल ,अकबरपुर ,दीपाकरहर, बरदौन, महेंगरो, औरैया,रजला आदि गांव के लोग ज्यादा लाभान्वित होंगे क्योंकि बरसात के दिनों में ये सभी गांव टापू बन जाता है जिसके कारण आवागमन की सुविधा खत्म हो जाता है।  इस पुल के निर्माण से इन सभी गांव के लोगों में के बीच खुशी का वातावरण बन गया जबकि इससे झारखंड से जमुई आने जाने वाले नक्सलियों, अपराधियों को लगाम लगाने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी। इतना ही नहीं इससे किसानों, ग्रामीणों को शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार आदि का भी लाभ मिलेगा।
  वहीं पाठकों को बताते चलें कि, इस पुल निर्माण को लेकर दोनों राज्यों के लोग वर्षों से इसके लिए आंदोलन कर रहे थे। वर्ष 2006 में सर्वप्रथम पुल निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। उस समय इसके निर्माण में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आधे दर्जन मंत्रियों की उपस्थिति में शिलान्यास किया था। पुल निर्माण के लिए राशि लगभग पांच करोड़ सोलह लाख रुपये का आवंटन हुआ, लेकिन निर्माण कार्य प्रारंभ होने के कुछ ही दिन बाद नक्सलियों ने लेवी की मांग की । लेवी नहीं मिलने पर कार्य बंद करवा दिया जब कुछ ही दिन बाद पुनः कार्य प्रारंभ हुआ तो आसपास के इलाके के अपराधियों ने कार्य बंद करवा दिया।  वहीं कुछ ही दिनों बाद पुनः 2013 में पुल निर्माण का कार्य शुरू हुआ तो महज 20 दिनों के बाद 27 जनवरी 2013 को निर्माण कार्य  में लगे 8 मजदूरों को नक्सलियों ने अगवा कर लिया  जिसके कारण फिर पुनः  इस पुल का निर्माण कार्य बंद हो गया।  एक दशक से निर्माण कार्य बाधित होने के बाद इसका लागत भी कई गुणा बढ़ गया। 
फिर पुनः मई-जून 2016 में इसके निर्माण को लेकर टेंडर निकाल कर  कार्य शुरू किया गया फिर बीच में कार्य बाधित हुआ फिर पुनः 2017 में निर्माण कार्य शुरू हुआ।



इस पुल निर्माण में हङखार पंचायत के मुखिया मुन्ना साह, तुलसी यादव, सुखदेव यादव दीपक हेंब्रम, रमेश हेंब्रम, पुना साव,अयोध्या साह, नवादा जिला के ब्रह्मदेव रविदास, राजकुमार यादव झारखंड के गिरिडीह जिला के गेनो यादव, राजेंद्र यादव,हेमन राय आदि लोगों के द्वारा आपसी समन्वय बैठाकर तथा जिला प्रशासन की मदद से पुल निर्माण कराया गया। 
बरहाल जो भी हो इस पुल के निर्माण हो जाने से आसपास के इलाके के सैकड़ों गांव के लोगों में खुशी देखी जा रही है।