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अलीगंज : पैसे की चमक से फीकी हो रही लोगों की सेहत, मिठाईयों में मिलावट जारी

{अलीगंज | चन्द्रशेखर सिंह}

सनातन धर्म के त्योहारों ने दस्तक देना आरंभ कर दिया है। दीपावली और छठ जैसे पर्व दहलीज पर खड़े हैं। इस त्योहार के पर्व में मिठाईयों की बिक्री बढना स्वभाविक है। बिक्री बढ़ते ही मिलावटी मिठाईयो की आवक भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने अपनी मिठाई की गुणवत्ता की पहचान करने में खासी दिक्कत संभव है। हो सकता है कि उपभोक्ता चमकती व रंगीन मिठाईयों के आकर्षण में फंस जाए।


मिलावट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि डोडा बर्फी मिल्क केक व कलाकंद जैसी महंगी मिठाई महज 140-200 रूपये प्रति किलो बिकनी शुरू हो गई है। जबकि दुध का भाव चालीस रूपये किलो से अधिक है। ऐसे में इतनी महंगी मिठाई इतनी सस्ती कैसे हो सकती है ? जाहिर है कि ये सभी मिठाईया सिंथेटिक व खतरनाक रसायनों से मिलकर बनी होगी। लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जवाबदेह स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में अभी सेंपलिंग तक शुरू नहीं की है। 

अलीगंज बाजार सहित जिले भर में मिठाई की लगभग तीन हजार दुकानों से अधिक है। जिले भर में दुर्गा पुजा से लेकर भाईदूज तक बाजार में करोड़ों की मिठाई की बिक्री होती है। लाखों की मिठाई सिर्फ दीपावली में बिकती है । पर पैसे की चमक ने लोगों के स्वास्थ्य को फिका कर दिया है।


-क्या कहते हैं जेनरल फिजिशियन -

डॉ ए आर काजमी बताते हैं कि मिलावटी मिठाई यानी मीठा जहर है। रंगीन मिठाई बनाने के लिए जो केमिकलस इस्तेमाल किये जाते हैं, वे किसी जहर से कम नही है। किडनी रोग, डायरिया,फुड प्वाइजनिंग जैसी बीमारियों हो जाती है। कैंसर भी हो सकता है साथ ही ज्यादा चीनी खाने से मधुमेह का खतरा भी बढ़ जाता है।