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अगस्त क्रांति के सूत्रधार थे कोशी के प्रखर स्वतंत्रता सेनानी राजेश्वर प्रसाद सिंह



[मधेपुरा]       ~अनूप नारायण
कोशी क्षेत्र के मधेपुरा जिला के ग्राम तरुणेश्वरपुर झिटकिया के रहने वाले अग्रगण्य स्वतंत्रता सेनानी शिक्षाविद राजेश्वर प्रसाद सिंह शुरू से है बहुमुखी विलक्षण प्रतिभा के धनी थे l पिता हिर्दय नारायण सिंह जो की उस क्षेत्र के वरिष्ठ स्वतंत्रता सेनानी थे उन्हीं के छत्रछाया में पुत्र राजेश्वर प्रसाद सिंह भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आज़ादी के जंग में कूद पड़े l पिता पुत्र दोनों ही  मिलकर देश की आज़ादी के लिए अपने आप को समर्पित कर दिया lवैसे तो इनका जन्म सुपौल जिले के ग्राम बरुवारी में हुआ मगर स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान  सन 1937 में छात्रों के दल का नेतृत्व करते हुए महिषी, सोनबर्षा, मधेपुरा, धमदाहा पूर्णिया व कई अन्य जिलों में क्रन्तिकारी कार्य करते रहे l

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गाँधी महात्मा अरविंद तथा डॉ राजेंद्र प्रसाद के विचारों से प्रभावित रहे l राजनितिक जीवन के प्रारम्भ से ही वे अहिंसक समाजवादी एवं धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के पोषक रहे l क्रूर ब्रिटिश शासन द्वारा शोषण उत्पीड़न मानसिक दबाव डालने के कारण उनके मन में क्रांति पैदा हुई साथ ही रंगभेद की नीति के कारण परतंत्रा के प्रति नफरत पैदा हुई ब्रिटिश शासन के जुल्मो शितम के खिलाफ उन्होंने अपने आवाज़ बुलंद करने की ठान ली  एवं भारत छोड़ो आंदोलन में करो या मरो के संकल्प के साथ कूद पड़े l  इसके बाद जनांदोलन और ही बड़ा रूप लेने लगा जगह जगह सामूहिक जुलुस इनके नेतृत्व में निकाला गया l अपने क्रन्तिकारी साथिओं के सहयोग से कलाली बंद करवाया डाकघर बंद करवाया, रेल लाइन की पटरिओं को हटवाया एवं धमदाहा थाना के अतंर्गत सभी जनता को 24 अगस्त 1942 आने हेतु आग्रह किया एवं धमदाहा थाना रेड उनका सफल रहा मगर 25 अगस्त को 1942 को अंग्रेजी पुलिस ने धमदाहा थाना के आहाते से इनके पांच क्रन्तिकारी साथिओं को गोली मारकर शहीद कर दिया l इस दौरान उन्हें 2 बार जेल भी जाना पड़ा lधमदाहा थाना रेड केस में गिरफ्तार कर इन्हे पूर्णिया और फिर भागलपुर कैम्प जेल भेज दिया गया l
इनके ऊपर कानून की धारा 144, धारा 302 आदि विभिन्न धाराएं लगाकर बेड़िओ में जकड़ कर कैद कर दिया गया l इसके बावजूद भी जेल में इन्होने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ नारेबाजी व आमरण अनसन करते रहे l आंदोलन में इनकी सक्रियता को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने इन्हे करीब पांच वर्षों तक जेल में रख कई तरह की यातनायें दी फिर भी राजेश्वर बाबू ने इंकलाब जिंदाबाद और वंदे मातरम का नारा बोलते रहे l
राजेश्वर बाबू सामाजिक सरोकार से जुड़े हुए व्यक्तित्व थे l एक शिक्षाविद के रूप में समाज के हर तबके को शिक्षित करने के लिए सदैव तत्पर रहे l हिंदी से बैचलर डिग्री व साहित्यरत्न, सी. टी प्राप्त कर कई विद्यालयों और विश्विद्यालय में सम्बंधित व कार्यरत रहे l एवं शुरुवाती दिनों से ही समाज में शिक्षा का अलख जगाने के लिए समर्पित रहे मधेपुरा उच्च विद्यालय, शिक्षण प्रशिक्षण विद्यालय मधेपुरा के प्राचार्य के रूप में कार्यरत होकर हज़ारो शिक्षकों को प्रशिक्षण देकर राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किए l
स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाने हेतु आज़ादी के पच्चीसवें वर्ष राष्ट्र की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा ताम्र पत्र से सम्मानित किए गए एवं भारत सरकार द्वारा इनके नामों को शिलालेख पे अंकित किया गया जो वर्तमान में मुरलीगंज ब्लॉक में स्थापित है l यह इस क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है l
उनकी व्यक्तित्व व कृतित्व के कारण उन्हें युगों युगों तक उन्हें नमन व स्मरण किया जायेगा l उनकी 29 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि कोटि नमन l