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पटना : लोग इसे लालू की मिठाई दुकान कहते हैं, 4 भाई मिलकर 32 सालों से चला रहे



[पटना]    ~अनूप नारायण
पटना हार्डिंग रोड से गुजरते वक्त अनायास नजर रुक जाएगी इस दुकान पर। दिलबहार, रसगुल्ला और दही चूड़ा के साथ कचौड़ियां खाने के लिए लगी रहती है भीड़।
दो सौ लीटर दूध की है हर दिन खपत। अगर आप हज भवन जा रहे हैं तो आपकी नजर अनायास बिना नाम की मिठाई दुकान की भीड़ पर टिक जाएगी। एक झोपड़ी में बिना एसी, आधुनिक व्यवस्था के खाने वालों की भीड़।
सुबह पांच बजे से रात के नौ बजे तक इस दुकान में ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है। पॉश इलाका होने के बाद भी इस दुकान में इतनी भीड़ आपको चौका सकता है। क्योंकि लोग इसे लालू की दुकान कहते हैं। लेकिन दुकान चलाने वाले अजय, गोरखनाथ, सुभाष औार सोनू इससे इक्तेफाक नहीं रखते। वे बताते हैं 50 साल पहले अरवल जिले से उनके पिता राजेन्द्र प्रसाद चंद्रवंशी रोजी-रोटी की तलाश में पटना आये थे। वे यहां पर लिट्टी-चोखा बेचा करते थे। माता-पिता की मौत के बाद उन्होंने दुकान की जिम्मेवारी संभाल ली।


दिलबहार, रसगुल्ला और दही चूड़ा के साथ कचौड़ियां खाने के लिए लगी रहती है भीड़। इस दुकान में मिलने वाला दही-चूड़ा काफी प्रसिद्ध है। कई समृद्ध लोगों के सुबह का नास्ता दही-चूड़ा के रूप में यही करना पसंद करते हैं। आरा का प्रसिद्ध बेलगामी यहां दिलबहार के नाम पर बिकता है। गोरखनाथ बताते हैं दिलबहार शुद्ध खोये से बनाते हैं। हर दिन उनके यहां दूध की खपत दो सौ लीटर है। बात रसगुल्ले की हो तो यहां बेहतर पटना में शायद ही कहीं मिलती हो। यहां का रसगुल्ला पटना के कई रेस्टोरेंट वाले इस्तेमाल करते हैं।