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जादूगरी के साथ फिल्मों में भी पहचान बना रहे हैं घनश्याम मिश्रा

Gidhaur.com (मनोरंजन) : कोलकाता के मशहूर जादूगर और भोजपुरी फ़िल्मी कलाकार घनश्याम मिश्रा आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनकी अदाकारी से आज उन्हें हर कोई पहचानता है। प्रस्तुत है घनश्याम मिश्रा की गिद्धौर डॉट कॉम के लिए अनूप नारायण से हुई बातचीत के अंश।

प्रश्न: घनश्याम जी आप कहाँ के है आप का जन्म कहा हुआ और कितने सालो से मैजिक शो का प्रोग्राम् कर रहे है?
जबाब: मैं बिहार के बक्सर जिला के बड़का राजपुर के गाँव का हु। मेरा जन्म कोलकाता में हुआ मई बिगत 27 सालो से मैजिक शो कर रहा हु। मैंने देश बिदेश में कई शो किये।बॉलीवुड के धर्मेंदर जिसे ले कर मनोज तिवारी आदि कई कलाकारों के समच्छ अपनी जादुई कला का प्रदर्शन कर चूका हु। मेरे पिता डॉ संत कुमार मिश्रा पेशे डॉक्टर थे।

प्रश्न: मैजिक शो के साथ फ़िल्म मेरा मतलब भोजपुरी फ़िल्म से कैसे जुड़े और किन किन फिल्मो में अभिनय किया?
जबाब: मेरा मैजिक शो पहला प्रेम है और साथ साथ फ़िल्मी दुनिया से भी लगाव था । लेकिन मै भोजपुरी फ़िल्म दुनिया में बन रही ज्यादात्तर फिल्मों से दुखी था क्योकि ये सारी फ़िल्म अश्लीलता की धुरी पर नाच रही थी।उस समय भी फ़िल्म का ऑफर आया था लेकिन मैंने न कर दिया क्योकि जो फ़िल्म मै अपने परिवार को देखने के लिए मना कर सकता हु तो जनता को कैसे देखने के लिए बोल सकता हु। फिर मेरे मित्र निर्माता राश बिहारी रवि और निर्देशक पप्पू भारती की प्रेरणा और सहयोग से बहुचर्चित भोजपुरी फ़िल्म "प्रेम प्यार में" में काम करने का मौका मिला । और इसके लिए मैं  निर्देशक पप्पू भारती का बहूत आभारी हूँ जिन्होंने मेरे भीतर की कला को निखारा और अपनी  जादूई मेहनत से मुझ जैसे  एक जादूगर को  रुपहले पर्दे का कलाकार बनाया। इस फ़िल्म को लेकर  मैं दावे के साथ कह सकता हु ये फ़िल्म आप अपने पुरे परिवार के साथ देखने की हिम्मत रख सकते है और ये फ़िल्म उन लोगो के मुह पर करारा तमाचा है जो कहते थे की भोजपुरी फ़िल्म बिना अश्लीलता के नहीं चल सकती है।

प्रश्न : दर्शकों से और कुछ कहना चाहेँगे आप?
जवाब : जी मेरा  कहना है कि भोजपुरी फिल्मों  के वे दर्शक जिन्हें अपनी माटी ,साहित्य और संस्कृति से प्रेम हैं। वे सारे लोग भोजपुरी फिल्मों में अश्लीलता एवम द्विअर्थी गीतों की   वजह से सीनेमा हाल से नदारद  हैं । उन से हमारी विनती है कि भोजपुरी फिल्मी दुनिया में जो निर्माता और निर्देशक सामाजिक और पारिवारिक सलिल फिल्मे बनाते है  आप उनकी फिल्में देख कर उन्हें प्रोत्साहित करे जिससे वे आप सबों के समक्ष  हमेसा साफ सुथरी  फिल्मे परोस कर आप का मनोरंजन करते रहें और साथ ही  भोजपुरी संस्कृति को बचाये रखें। इससे फिल्म जगत में भोजपुरी फ़िल्म उद्योग भी कायम रहेगा।

अनूप नारायण
21/06/2018, गुरुवार