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खोखले साबित हो रहे जमुई रेलवे स्टेशन के विकास के वादे

[gidhaur.com | News Desk] :- जमुई रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान, यात्री सुविधाओं को लेकर इस स्टेशन को विकास करने की घोषणा करने वाले DRM के वादे अब झूठे लगने लगे हैं।
दरअसल, पिछले वर्ष यानि 2017 के 07 नवंबर (मंगलवार) को जमुई रेलवे स्टेशन के विकास के लिए ₹ 04 करोड़ खर्च किये जाने की बात कहने वाले DRM रंजन प्रसाद ठाकुर के इस घोषणा के बाद जमुई वासियों में एक उम्मीद की किरण जगी थी। इस घोषणा के अनुरूप ₹ 04 करोड़ की लागत से यात्री सुविधाओं के लिए कई योजनाओं का क्रियान्वयन होना था।

[बूझने लगी है उम्मीद की किरण]

घोषणा के आज लगभग 06 महीने बीत जाने के बाद जमुई रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं की बात करना बेईमानी लग रही है। या फिर यूं कहें कि घोषणोपरान्त जो उम्मीद की किरण रेल यात्रियों के अंदर जगी थी, वह बूझने के कगार पर पहुँच गई है। यात्री सुविधाओं की जब बात सामने आते ही धरातल पर वास्तविकता जमुई रेलवे स्टेशन के टिकट काउन्टर पर दिखती है।
जी हाँ, यहां आलम यह है कि, जमुई रेलवे स्टेशन पर मात्र 3 काउंटर मौजूद हैं, जो सूर्यास्त होते ही उनमें से 2 काउंटर के कर्मी गायब नजर आते हैं। लिहाजा बाकी के 1 काउन्टर पर अनुपात से अधिक यात्रियों का भारी जन सैलाब देखने को मिलता है।

[आमदनी रूपया, खर्चा अठन्नी]

विदित हो कि, दानापुर मंडल अन्तर्गत आने वाला यह जमुई स्टेशन,  कमर्शियल रूप में अपना एक अलग स्थान रखता है। रोज़ हज़ारों की संख्या में यात्रा करने वाले रेल यात्रियों की भीड़ लगा रहना यह दिखाता है कि यह स्टेशन प्रतिदिन सरकार को लाख रूपये देती है। उसके उपरांत भी, सुविधाओं के मामले में अत्यन्त पिछड़ा यह स्टेशन कई मामलों में सभी से पीछे छुटा हुआ है ।

[स्टेशन के दोनों प्लैटफाॅर्म पर अलग अलग होते हैं टाइम जोन]
बात सिर्फ टिकट काउन्टर और आय देने पर ही   खतम नहीं होती, कुछ दिन पूर्व तो जमुई स्टेशन के एक प्लेटफार्म को भारत और दूसरे प्लेटफार्म को जापान में पाया जा रहा था। चौकिए मत, कहने
का आशय है कि एक ही रेलवे स्टेशन पर बने दोनों प्लेटफार्म पर लगे डीटीटल घडियां अलग-अलग टाइम जोन को दर्शा रही थी।

[खुले में शौच को विवश होते हैं यात्री]

वैसे तो काफी दिन बित गए, सरकार बंद दरवाजे के पीछे शौच करने को लेकर एड़ी चोटी का दम लगा रही है, पर जमुई रेलवे स्टेशन पर सुविधा योग्य शौचालय उपलब्ध न रहने से पुरूष के साथ साथ महिला यात्री भी खुले में शौच को विवश हो जाते हैं। लिहाजा इसके दुर्गन्ध से प्लेटफार्म पर ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे यात्रियों को नाक पर रुमाल रखना पड़ता है।

 

     [हाथों में है दम, तभी मिलेगा टिकट, नहीं तो WT]
सूर्यास्त के बाद जमुई रेलवे स्टेशन पर निष्क्रिय होने वाले दो टिकट काउन्टर के बाद जब यात्रियों की कतार सिर्फ एक काउन्टर पर लगती है तो वहाँ ताकत रेल सिस्टम की नहीं, बल्कि यात्रियों के हाथों पर दिखता है, जो सबसे पहले टिकट लेने के लिए अपना हाथ टिकट काउन्टर पर घुसाते हुए दिखते हैं। मतलब टिकट काउन्टर पर लाइन लगने से टिकट नहीं बल्कि मायूसी हाथ लगती है।
इस जद्दोजहद को देखकर कई यात्री तो बिना टिकट के ही रेल सुविधा लेकर अपने गंतव्य स्थान की ओर चलते बनते हैं, जिससे रेलवे को आर्थिक तौर पर नुकसान सहना होता है।


[यात्रियों ने दानापुर के DRM को Twitter पर दी जानकारी]
जमुई स्टेशन पर यात्रियों के लिए टिकट काउन्टर, पेयजल, समेत अन्य सुविधा पर ध्यानाकृष्ट करते हुए यात्रियों ने दानापुर रेल खंड के डीआरएम को ट्वीट करके इसकी जानकारी दी है। जिसके प्रतिउत्तर में डीआरएम ने इस मामले में अधिकारी लोगों के सक्रिय होने की बात कही।
इसके पहले भी कई दफा इसी सुंदर्भ में कई तरह की तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तैरते नजर आ रहे थे, जो जमुई रेलवे स्टेशन का पूरे सूरत-ए-हाल ब्यां कर रहा था।

 
पाठकों को जानकारी से अवगत करते चलें कि, दानापुर रेल खंड के तहत आने वाले जमुई रेलवे स्टेशन पर सुविधा को लेकर यात्री हमेशा से उपेक्षित होते आए हैं, पर प्रत्येक दिन लाखों की आय देने वाले इस स्टेशन के कायाकल्प में फिलहाल कोई बदलाव नहीं आ सका है, न तो स्वच्छता में, न ही टिकट काउन्टर पर बैठने वाले कर्मचारियों की।
हलांकि जमीनी तौर पर कोशिशें तो बहुत होतीं हैं, पर ये सिस्टम है कि मानता नहीं...
(रवि मिश्रा)
जमुई |  11/05/2018, शुक्रवार
Edited by - Abhishek Kumar Jha.
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