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पटना सिटी के सुल्तानगंज गंगा नदी में दिखेगा डॉल्फिन, CM का प्रयास जारी

gidhaur.com(पटना) :- बृहस्पतिवार को सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बहादुर पुर हाउसिंग काॅलोनी स्थित भारतीय प्राणी सर्वेक्षण द्वारा हरित कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा डॉल्फिन संरक्षण से जुड़े 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया।
समभूमि प्रादेशिक केंद्र में आयोजित प्रशिक्षण शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने सबसे पहले केंद्र
के प्रांगण में वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री ने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र के जंतु संग्रहालय  का बारीकियों  से मुआयना  किया।  हरित कौशल  विकास  कार्यक्रम के अंतर्गत गंगा डॉल्फिन संरक्षण के प्रशिक्षण उद्घाटन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को हरित पौधा, अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री सहित मंच पर उपस्थित अतिथियों ने ‘डॉल्फिन राजा’ नामक पुस्तिका का भी विमोचन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र के पदाधिकारियों को जंतु संग्रहालय को और भी बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गंगा की अविरलता और निर्मलता कायम रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री डाॅ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि हमने गंगा रिवर बेसिन अथाॅरिटी की आयोजित बैठक में डाॅल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित करने का सुझाव दिया और उस समय के तत्कालीन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के मंत्री रहे श्री जयराम रमेष की पहल पर डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया।
मुख्यमंत्री ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा आज तक पटना यूनिवर्सिटी में डॉल्फिन रिसर्च सेंटर नहीं खोला गया, जबकि इसके लिए पैसे का भी प्रबंध किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि अगर दो माह के अंदर विश्वविद्यालय प्रबंधन डॉल्फिन रिसर्च सेंटर के लिए जमीन उपलब्ध कराकर इसका शिलान्यास नहीं कराएगा तो विवश होकर भागलपुर शिफ्ट करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा नदी के सिल्टेशन की समस्या सिर्फ सिल्ट हटाकर नहीं हो सकती बल्कि इसके लिए आवश्यक है नदी में पानी का 50 प्रतिशत तक प्रवाह बढ़ाने के साथ ही फरक्का बांध पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि 4,000 क्युसेक पानी का प्रवाह अपस्ट्रीम में होता है, जबकि बिहार से सिर्फ 1500-1600 क्युसेक ही पानी निकलता है। अन्य नदियों के गंगा में मिलने से यहाँ पानी का प्रवाह बढ़ता है। उन्होंने कहा कि गंगा नदी को सिल्ट से निजात दिलाने के लिए नेशनल सिल्ट मैनेजमेंट को नेशनल सिल्ट पाॅलिसी बनानी होगी। गंगा किनारे आर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए जैविक काॅरिडोर बनाया गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बाघों की संख्या से जंगल की स्थिति का पता चलता है, ठीक उसी प्रकार अगर गंगा नदी की स्थिति जाननी हो तो डॉल्फिन के बारे में जानना आवश्यक है।
बिहार में आबादी के घनत्व को देखते हुए अब यहाँ 17 प्रतिशत तक हरित आवरण किया जा सकता है। हरियाली मिशन के जरिये 24 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें अब तक करीब 20 करोड़ वृक्ष लगाये जा चुके हैं। पर्यावरण की रक्षा के लिए सामाजिक जागरूकता लाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञ लोगों से अनुरोध करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें सिर्फ डॉल्फिन और गंगा की निर्मलता, अविरलता के बारे में न सोचकर पूरी पृथ्वी और पर्यावरण को ध्यान में रखकर सोंचने और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पटना सिटी के सुल्तानगंज के पास गंगा नदी पर पुल बन रहा है, जहाँ से लोग डॉल्फिन को देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार में डॉल्फिन की संख्या सबसे अधिक है और यदि लोग डॉल्फिन को तंग नहीं करेंगे तो गंगा की निर्मलता कायम रहेगी।
कार्यक्रम को उप मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी, झारखंड सरकार के मंत्री श्री सरयू राय, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति श्री रासबिहारी सिंह, नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति सह डॉल्फिन मैन ऑफ इण्डिया श्री आर0के0 सिन्हा, बिहार राज्य प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के चेयरमैन श्री अशोक कुमार घोष ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के निदेशक डॉ0 कैलाश चंद्रा, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण, कोलकाता के संयुक्त निदेशक डॉ0 के0 राज मोहना, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण गंगा समभूमि प्रादेशिक केंद्र के प्रभारी पदाधिकारी डॉ0 गोपाल शर्मा, वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव श्री त्रिपुरारी शरण, मुख्यमंत्री के सचिव श्री अतीश चंद्रा, मुख्यमंत्री के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री गोपाल सिंह सहित कई गणमान्य लोग, वरीय पदाधिकारीगण एवं स्कूली छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
(न्यूज डेस्क)
05/05/2018, शनिवार
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