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रेप की घटनाओं पर बोली नारिशक्तियाँ - मिले ऐसी सजा कि फिर किसी की हिम्मत न हो


विशेष : पिछले कुछ दिनों से देश के हालात बेहद अजीब से हो गए हैं. पहले तो महिलाएं सुरक्षित नहीं थी और अब छोटी-छोटी बच्चियों तक को बख्शा नहीं जा रहा. कुछ दिनों से लगातार जितनी ख़बरें आ रही हैं उनमें किसी दरिंदे की हवस का निशाना कोई बच्ची ही रही.



कठुआ की मासूम बच्ची का ज़ख्म अभी ताज़ा ही था कि बिहार के सासाराम में भी ऐसा कुछ हो गया. रोहतास जिले के करगहर में एक छह साल की बच्ची के साथ रेप हुआ. ये घटना जितना व्यथित करती है, उतना ही गुस्सा भी दिलाती है.



वहीं शनिवार की रात राजधानी पटना में जीपीओ गोलंबर के पास एक किशोरी के साथ गैंगरेप हुआ. चार में से दो दुष्कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया गया है.



आप अख़बार पलटें या टीवी पर न्यूज़ चैनल लगायें या फिर सोशल मीडिया पर आने वाले न्यूज़ पोर्टल्स के ख़बरों को पढ़े, हर दिन ऐसी घटनाएँ आपके सामने होती हैं. सूरत में एक 9 साल की बच्ची के साथ रेप किये जाने का मामला भी प्रकाश में आया है. इस बच्ची को 8 दिनों तक बंधक बनाकर उसके साथ रेप किया गया और फिर वहीं के एक क्रिकेट मैदान में फेंक दिया गया. बच्ची के शरीर पर 86 से ज्यादा जख्म पाए गए हैं.



एनसीआर के गाजियाबाद में दृष्टिहीन नाबालिग से दुष्कर्म तो अमेठी में गर्भवती के साथ गैंगरेप. वहीं देश की राजधानी दिल्ली के सुल्तानपुरी में में बंधक बनाकर दुष्कर्म किये जाने की खबर है.

इन घटनाओं पर देश की नारिशक्तियों की क्या प्रतिक्रिया है, यह जानने की हमने कोशिश की. दुष्कर्मियों को क्या सजा दी जानी चाहिए और न्यायतंत्र और देश की सरकार को इस मुद्दे पर क्या ध्यान दी जानी चाहिए इस पर महिलाओं एवं किशोरियों से बातचीत की गई.

कुछ ने कहा कि भ्रूण हत्या पर रोक से पहले उन बच्चियों को बचाना चाहिए जो इस दुनिया में आ चुकी हैं. वहीं अधिकतर ने दोषियों को फांसी देने की मांग की. कुछ ने तो यहाँ तक कहा कि दुष्कर्मियों के जननांगो को काट दिया जाना चाहिए.

नारिशक्तियों से मिली प्रतिक्रियाओं को आप भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया भी नीचे के कमेंट बॉक्स में जरुर दें.


(आर्या सिंह)
सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय रहने वाली वरिष्ठ शिक्षिका आर्या सिंह कहती हैं कि धर्म अथवा जाती को बीच में न लाकर दुष्कर्मियों को सीधा फांसी की सजा दी जानी चाहिए. न तो दोषियों की धर्म देखी जानी चाहिए और न ही उनकी जिनके साथ दुष्कर्म जैसी वीभत्स घटना हुई है. प्रशासन एवं न्यायपालिका को बिना किसी दबाव में निष्पक्ष न्याय करते हुए दोषियों को सजा दी जानी चाहिए. और यह सजा इतनी कड़ी होनी चाहिए कि आगे से ऐसी मानसिकता वाले लोग इस तरह के अपराध करने की सोच भी न सकें.
(अनामिका)
बिजनेसवीमेन अनामिका का कहना है कि इस धार्मिक देश में, जहां देवी दुर्गा माँ के रूप में पूजी जाती है, देवी लक्ष्मी को धन की देवी के रूप में पूजा जाता है, यहां तक ​​कि हमारी धरती को भी माँ के रूप में माना जाता है, उसी देश में महिलाओं की गरिमा बार-बार तार-तार की जाती है. सरकार को इन बीमार दिमाग वाले बलात्कारियों और हत्यारों को सज़ा देने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए. देश के विभिन्न स्थानों पर लगातार हो रहे रेप जैसी घटनाओं से हिंदुस्तान लज्जित है.
(अपराजिता)
शिक्षाविद अपराजिता कहती हैं कि मैंने बहुत सारे राक्षसों का इतिहास पढ़ा है लेकिन उनमें से कोई बच्चों का बलात्कारी नहीं था. ऐसी घटनाओं पर मोमबत्तियां जला देने से कुछ नहीं होगा, अगर इन हैवानों को सबक सिखानी है तो उन्हें जिन्दा जला देना चाहिए. बलात्कारी को मौके पर ही सजा दी जानी चाहिए.
(सायमा)
स्नातक की पढ़ाई कर रहीं सायमा की माने तो उनका कहना है कि समझ नहीं आता कि इतनी छोटी-छोटी बच्चियां इन दरिंदों को कैसे प्रोवोक कर देती हैं जो उनके खेलने की उम्र में ऐसी घिनौना काम कर देते हैं. कैंडल जला लेने या विरोध कर लेने भर से नहीं होगा. जितने भी दोषी हैं सभी को एट द टाइम सजा दी जानी चाहिए. सभी रेपिस्ट्स का जननांग काट दिया जाना चाहिए और उन्हें सड़कों पर छोड़ दिया जाना चाहिए. केवल इतना हो जाये देश में, हर लड़की संतुष्ट हो जाएगी.
(सृष्टि)
एमिटी की छात्रा सृष्टि अपना आक्रोश जाहिर करते हुए कहती हैं कि दुष्कर्मियों के लिए फांसी की सजा कम होगी. फांसी देने से बेहतर है कि उनके जननांग को काट दिया जाए और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाए. सरकार भ्रूण हत्या रोकने की बात करती है. पहले तो जो लड़कियां इस दुनिया में आ चुकी हैं उन्हें सुरक्षित रखने पर ध्यान दिया जाना चाहिए. अब तो छोटी-छोटी बच्चियां भी सुरक्षित नहीं हैं.
(गुरबानी)
लेखिका गुरबानी के अनुसार सबकुछ का मूल कारण कमजोर सरकार और साथ ही सांप्रदायिकता है. ये तो हद है कि एक आठ साल की बच्ची के साथ रेप को लोग धर्म के साथ जोड़ रहे हैं. ये कैसा धर्म है कि आप मंदिर जैसे पवित्र जगह पर रेप जैसा घिनौना काम कर रहे हैं! पहला धर्म इंसानियत और मानवता का सम्मान करना है. अगर आप इंसानियत को कलंकित होने से नहीं बचा सकते तो आप धर्म के ओछे ठीकेदार हैं. भारत सरकार के ढुलमुल रवैये से घिन आती है. दोषियों को हर हाल में कठोर सजा मिलनी चाहिए.
(मनीषा)
छात्रा मनीषा कहती हैं, रावण ने माता सीता का अपहरण किया था, लेकिन उन्हें हाथ तक नहीं लगाया. बावजूद इसके हम हर वर्ष रावण के कृत्यों की वजह से उसका पुतला जलाते हैं. जबकि हर पल देश के किसी न किसी जगह किसी बेटी-बहन के साथ रेप होता है, लेकिन हम शांत बैठे रह जाते हैं. जिस दिन इस देश की लड़कियां रात के अँधेरे में भी सड़क पर बेख़ौफ़ चल सकेंगी, उसी दिन सही मायने में देश आज़ाद हो पायेगा.

अब घटना चाहे सासाराम की हो या फिर कठुआ की या फिर पटना या सूरत कि या फिर एनसीआर की. ये तमाम घटनाएं हमारे देश के दामन पर कलंक का दाग हैं. हम इनसे आहत भी हैं और शर्मिंदा भी. जो देश अपनी बच्चियों के अस्मत तक की हिफाज़त नहीं कर पा रहा, वह किस मुंह से खुद को विश्वगुरु कहेगा!

सुशांत साईं सुन्दरम
15/04/2018, रविवार