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भारत बंद : कितना असरदार, कितना विफल

[gidhaur.com | News Desk] :- एससी एसटी एक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में दलित और आदिवासी संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया था। इस बंद का व्यापक असर बिहार के विभिन्न हिस्सों के साथ साथ ट्रेन, बैन्क, भी देखने को मिल रहा है। बात यदि जमुई जिले की करें तो समुदाय के द्वारा कई जगह जूलूस निकाला जा रहा है। इस रूट की तमाम ट्रेनों को बाधित कर दिया गया है लिहाजा, रोजाना ट्रेन से आने जाने वाले बैन्क एवं अन्य सरकारी व गैर सरकारी दफ्तरों के कर्मचारियों को काफी परेशानियाँ उठानी पड़ी । 
दिन के 11 बजे बैंक ऑफ़ बड़ोदा में सन्नाटा
वहीं गिद्धौर के तमाम बैंकों में मार्च क्लोजिंग काम को लेकर जहां बैन्क कर्मियों को सवेरे आठ बजे ही बैन्क आना था लेकिन बंदी को लेकर बाधित हुए ट्रेन परिचालन से बैन्क कर्मचारियों को भी बैक पहुँचने में काफी सारी परेशानियाँ झेलनी पड़ी ।
लिहाजा गिद्धौर के कई बैन्कों में दिन के ग्यारह बजे तक कर्मचारियों का आभाव रहा। बंदी में ट्रेन परिचालन अनियमित रहने से बायोमैट्रिक लगे विद्यालयों में शिक्षक शिक्षिकाओं की उपस्थिति भी प्रभावित हुई। लेकिन बंद का असर गिद्धौर में नहीं देखा गया।
पर ट्रेन परिचालन बाधित होने से दो अप्रैल की संध्या  आठ बजे रात्रि तक मे भी गिद्धौर स्टेशन मे थोड़ा सन्नाटा छाया रहा।
राट नौ बजे सुनसान पड़ा गिद्धौर स्टेशन

बताते चलें कि, बंदकर्ताओं की  मांग थी कि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 में संशोधन को वापस लेकर एक्ट को पूर्व की तरह लागू किया जाए।
वहीं इस मामले पर सरकार का कहना था कि एससी- एसटी के कथित उत्पीड़न को लेकर तुरंत होने वाली गिरफ्तारी और मामले दर्ज किए जाने को प्रतिबंधित करने का शीर्ष न्यायालय का आदेश इस कानून को कमजोर करेगा।
दरअसल, इस कानून का लक्ष्य हाशिये पर मौजूद तबके की हिफाजत करना है। लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि, इस बंदी के कारण और कारक ने कुछ राजनीतिक पार्टियों को आंतरिक समर्थन दिया है परिणाम स्वरूप इस व्यापक बंदी का कारण और कारक दोनों सुरक्षित है।
(अभिषेक कुमार झा)
गिद्धौर | 02/4/2018, सोमवार
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