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गिद्धौर : मौसम की मार से मूंग के पौधे में आई सिकुड़न, किसान चिन्तित

[gidhaur.com | अभिषेक कुमार झा] :- कहते हैं कि प्रकृति के समक्ष इन्सान सदैव बेबस रहा है। इसे किसानों की बदकिस्मती कहें या मौसम की बेरूखी गिद्धौर के पतसंडा पंचायत अंतर्गत पूर्वा बहियार में तकरीबन 4 एकड़ में लगाए गए मूंग के पौधे में सिकुड़न आ गई है। अपने मेहनत से खड़े किए इस मूंग के पौधे में सिकुड़न को देखते हुए किसानों के माथे पर चिन्ता की लकीरें दिखने लगती है।
सिकुडते हुए मूंग के पौधे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कृषक विनोद यादव बताते हैं कि, हमलोग कुछ किसान भाइयों ने, तकरीबन 17-18 दिन पहले मौसम की खुशमिजाजी को देखते हुए दुकान से बीज लाकर मूंग की बुआई की थी। समयंतराल पर, पटवन के दौरान खाद व कीटनाशक का भी छिड़काव किया पर कुछ दिन पहले मौसम की बेरूखी से हम सभी किसान भाइयों की मेहनत पर पानी फिर गया। लिहाजा, 4 एकड़ में लगे मूंग की फसल के क्षति होने से हम किसानों को आर्थिक नुकसान भी पहूंचा है।

   [क्या कहते हैं किसान सलाहकार]

सिकुड़ चुके मूंग के पौधे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किसान सलाहकार धीरेन्द्र कुमार राय कहते है कि,मौसम से प्रभावित हुए मूंग की फसल से तो किसानों को आर्थिक झटका लगा है, फिर भी सरकारी प्रक्रियाओं के माध्यम से जो लाभ है वो मैं अपने स्तर से जरूर दिलाने में सहायता करूंगा।

   [प्रखंड कृषि पदाधिकारी की भी सुनिए]

मूरझाए हुए मूंग के 4-5 पौधे के सैम्पल को मंगवाते हुए प्रखंड कृषि पदाधिकारी विशुनदेव प्रसाद ने कहा कि अभी तक हमारे यहां विभागीय मूंग उपलब्ध नहीं हुआ है। लिहाजा मौसम की मार से प्रभावित हुए बाजारी मूंग के पौधे पर किसानों को मुआवजा देना उचित नहीं है। विभागीय बीज में आई शिकायतों पर सरकारी मुआवजे का प्रावधान है।

  [ये है मौसम का हाल]

मौसम विभाग के वेबसाइट से प्राप्त जानकारी अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के कारण आगामी 2-3 दिनों के दरमियां हल्की बारिश के साथ साथ मौसम में नमी रहने की संभावना है।जिससे की कुछ हद तक झारखण्ड, उत्तर भारत, दिल्ली और बिहार के लोगों को धूप की तपिश से राहत मिल सकेगी।

मौसम विभाग का यह फरमान आम लोगों के लिए जितना लाभकारी है, किसानों के लिए उतना ही नुकसानदेह, वो इसलिए क्योंकि मौसम में नमी रहने से मूंग के पौधे में सिकुड़न आना शुरू हो जाएगा।
विदित हो कि, गिद्धौर प्रखंड के 5 पंचायतों में मूंग के बूआई की प्रक्रिया आरंभ होने को है। लेकिन मौसम की रंगत से पतसंडा स्थित पूर्वा बहियार के  4 एकड़ में लगाए गए मूंग की बेहतरीन उपज की उम्मीद को लेकर किसानों ने इस बार उस खेत में गेहूँ की बुआई नहीं की।

लिहाजा पतसंडा समेत अन्य 2 पंचायतों के किसानों द्वारा लगाए गए मूंग की फसल को देखते हुए ये कहना कतई अनुचित नहीं होगा कि, इस बार बेमौसम बरसात और मौसम की बेमानी का असर सीधे गिद्धौर के किसानों की जेब पर पड़ा है, जिससे ये अन्नदाता काफी चिन्तित हैं। पर कहावत है कि, तब पछताय क्या होत, जब चिड़िया चूघ गई खेत!

(न्यूज डेस्क)
08/04/2018, रविवार
www.gidhaur.com