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धोखाधड़ी की भेंट चढ़ गई मेहनत की कमाई

[gidhaur.com | गिद्धौर] :-  एक पुरानी कहावत है, राम नाम जपना, पराया माल अपना...  व्यंग्यार्थ बोले गए इस पंक्तियों का आशय तो स्पष्ट है, पर ये पंक्तियां गिद्धौर जैसे ग्रामीण इलाके में चरितार्थ होती दिख रही है। जहां के ग्रामीण दिन रात मेहनत मजदूरी करके पैसे अर्जित करते हैं, फिर उस पैसों को अपने भविष्य की जरूरत को पूर्ति करने के लिए सबसे सुरक्षित स्थान बैंक को चयन करते है, और यदि बैंक ही धोखेबाज निकल जाये तो पाई पाई जुटाने वाले  बेचारे ग्रामीण लोग किस पर भरोसा करे ?
हम बात कर रहे हैं गिद्धौर-सेवा पैक्स को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड गिद्धौर की, जिसकी वर्तमान स्थिति उक्त कहावत से मेल खाती है।
इस बैंक के लापरवाह कार्यशैली का आलम यह है कि, बैंक के सैंकडों ग्राहक के पैसे को बैंक प्रबंधक द्वारा लोन दे दिया गया. जिसके कारण बैंक में राशि की किल्लत पड़ गई। बैंक में ग्राहकों द्वारा  लगभग ₹80 लाख और सरकारी विभाग के द्वारा लगभग ₹20 लाख जमा किए गये है, लेकिन जब अपनी राशि आहरण के लिए लोग जाते हैं तो बैंक हमेशा बंद मिलता है।

इसी संदर्भ में परिवार विकास संस्था के समन्वयक कपिलदेव यादव ने बताया कि इस बैन्क में गिद्धौर प्रखंडांतर्गत  पूर्वी गुगुलडीह, सेवा, एवं पतसन्डा पंचायत के तकरीबन 20 गावों के लगभग ₹4 लाख, सबसे निर्धन परिवार के जमा हैं,लेकिन बैंक के धोखाधड़ी के कारण पैसा मिलना थोडा कठिन सा दिख रहा है।

पाठक को जानकारी से अवगत करते चलें कि, कई ऐसे भी परिवार हैं जो बैंक के पैसे के बारे में बताते हुए फफक-फफक कर रो पड़ते हैं। इनके भीगे पलकें इस समस्या के जिम्मेदारों को तलाशते नजर आते हैं।

       [पैक्स अध्यक्ष का क्या है कहना]

इस संदर्भ में पैक्स अध्यक्ष राजीव कुमार साव उर्फ पिंकु साव ने बताया कि पटना के रजिस्ट्रार कोर्ट में यह मामला चल रहा है, कोर्ट के फैसले आने पर लोन की वसूली की जाएगी और इसके बाद लोगों के अपने अपने पैसे मिलेंगे।

यद्यपि पैक्स काॅपरेटिव बैंक अपने काल में ग्राहकों का आश्रय बनी रही, पर बैंक के बाहर लटकने वाले ताले, इन लाचार ग्रामीणों के मन में एक प्रश्न छोड़ देता है कि क्या सच में इनके मेहनत की कमाई धोखाधड़ी की भेंट चढ गई है।

(डब्लू पंडित)
Edited byअभिषेक कुमार झा
न्यूज डेस्क | 22/04/2018, रविवार
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