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एनडीए छोड़ महागठबंधन में मांझी, नाराज नरेंद्र सिंह का नहीं मिला साथ

Gidhaur.com (राजनीति) : बुधवार को होली से दो दिन पहले ही बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदले। एक ओर जहाँ भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से अलग होकर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) बिहार में राजद-कांग्रेस वाले महागठबंधन से जा मिला वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के चार विधान पार्षद पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अशोक चौधरी के नेतृत्व में सूबे के सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। 

कांग्रेस विधान पार्षदों के जदयू में शामिल होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निकाला
हालाँकि चारों कांग्रेस नेताओं के जदयू में शामिल होने के थोड़ी ही देर बार कांग्रेस पार्टी के प्रभारी प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। जिस पर चुटकी लेते हुए डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि अब जबकि वो जदयू में शामिल हो गए हैं उसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किया जा रहा है, कांग्रेस यहाँ भी लेट हो गई। 
मांझी के साथ नहीं दिख रहे पार्टी के बड़े नेता
दूसरी ओर महागठबंधन और एनडीए में तेजी से हुए इस फेरबदल में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के प्रमुख व सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी राजद के साथ जाने के मुद्दे पर अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए हैं। हम पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वृषिण पटेल के अलावा पार्टी का कोई भी बड़ा नेता मांझी के साथ नहीं दिख रहा
विरोधी गुट का नेतृत्व कर रहे नरेंद्र सिंह
महागठबंधन में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के मिलने पर पार्टी के भीतर ही विरोध के सुर उभर रहे हैं। हम पार्टी के संस्थापक सदस्य में माने जाने वाले कद्दावर नेता नरेंद्र सिंह विरोधी गुट का नेतृत्व कर रहे हैं। हम पार्टी के अधिकांश दिग्गज नेता जीतनराम मांझी के महागठबंधन में जाने के फैसले से सहमत नहीं हैं, ऐसे में उनका समर्थन भी नरेंद्र सिंह को ही है। 

हम के विरोधी गुट होली के बाद करेंगे आगे का निर्णय 
एनडीए छोड़ महागठबंधन में जाने के मांझी के एकतरफा फैसले से हम पार्टी के नेता पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री महाचंद्र प्रसाद सिंह, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा, उनके पुत्र राहुल शर्मा, पूर्व मंत्री अनिल कुमार आदि नाराज़ हैं। एक मीडिया हाउस से नरेंद्र सिंह की हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि कि वह अभी बिहार से बाहर हैं। एनडीए छोड़ महागठबंधन में जाने के पूर्व मुख्यमंत्री के फैसले से सहमत नहीं है। होली के बाद पटना आकर इसके खिलाफ अन्य वरिष्ठ साथियों के साथ बैठकर आगे का निर्णय लेंगे। लालू प्रसाद और राजद के साथ किसी भी हाल में कोई समझौता नहीं होगा।
नीतीश को मुख्यमंत्री बनाने में बड़ा हाथ रहा है नरेंद्र सिंह का 
नरेंद्र सिंह बिहार के दिग्गज नेता माने जाते हैं। राजनीतिक गलियारों में उनकी बड़ी पैठ है। नीतीश कुमार को 2005 में मुख्यमंत्री बनवाने में उनकी अहम भूमिका रही थी। 1990 के दौर में सबसे पहले लालू प्रसाद के खिलाफ विद्रोह का बिगुल भी नरेंद्र सिंह ने ही फूंका था। बाद में जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बनवाने और उन्हें बड़े दलित नेता के तौर पर मज़बूत बनाने में भी नरेंद्र सिंह की बड़ी भूमिका रही। 
हम के राष्ट्रीय महासचिव धनंजय ने भी दिखाए बगावती तेवर 
वहीं दूसरी ओर हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय महासचिव धनंजय सिंह ने कहा कि बिना किसी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाये मांझी जी ने पुत्रमोह में यह निर्णय लिया है। उन्होंने अपने परिवार के लाभ के लिए रातोंरात राजद से गठबंधन का फैसला किया है। जीतनराम मांझी को नीतीश कुमार ने सीएम बनाया लेकिन मांझी की छवि एक नेता की कभी नहीं थी। हम पार्टी में जितने भी कार्यकर्त्ता आये वो नरेंद्र सिंह की वजह से आये। नरेंद्र सिंह जेपी आन्दोलन के नेता और पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव रहे। राजनीती में नीतीश कुमार भी नरेंद्र सिंह के जूनियर रहे हैं। मांझी जी अपने और अपने बेटे के लिए ये सौदा किये हैं, उन्हें जो मिलना था वो मिल गया। लेकिन हमारा लक्ष्य है बिहार का निर्माण और हमलोग महागठबंधन का हिस्सा कभी नहीं बनेंगे। 

सुशांत साईं सुंदरम
01/03/2018, गुरुवार